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RSS प्रमुख की मुस्लिम धर्मगुरुओं से मुलाकात संघ की रणनीति का अहम हिस्सा, भाजपा के लिए तैयार की जा रही 2024 की पटकथा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत की मुस्लिम धर्मगुरुओं और बुद्धिजीवियों से मुलाकातें और संवाद अचानक से नहीं हैं। यह संघ की अहम रणनीति का हिस्सा है। इसके माध्यम से 2024 की पटकथा तैयार करने की कवायद की जा रही है। इसमें आरएसएस मुस्लिम और ईसाइयों से संवाद बढ़ाने पर जोर देने की तैयारी में है। जिससे कि धर्म आधारित गलतफमियों, दूरियों और संवादहीनता को दूर किया जा सके और राष्ट्र निर्माण में उनकी व्यापक सहभागिता सुनिश्चित हो सके। संघ की इसी पटकथा के बूते 2024 में भाजपा चुनावी मंच से देश में सांप्रदायिक एकता के नाम पर वोट भी मांग सके। इसी के साथ संगठन अपनी पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की कोशिश में है। संघ का यह प्रयास खुद के उस सोच के दायरे में है। जिसमें वह हिंदुस्तान में रहने वाले सभी लोगों को हिंदू मानता है। 

संघ की नीति को मूर्त रूप देने के लिए संगठन के अंदर चार सदस्यीय समिति बनाई है। इसका दायित्व सह सरकार्यवाह डा0 कृष्ण गोपाल व डा0 मनमोहन वैद्य के साथ अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल और वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार को दिया है। संघ की तरफ से यह कोशिश ऐसे समय में हो रही है। जब विपक्षी दलों के राष्ट्रीय नेता उस पर सर्वाधिक आक्रामक हैं। विपक्ष संघ पर आरोप लगाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा। इससे बेफ्रिक वह अपने प्रयासों में जुटा है। हाल के दिनों में ऐसी बैठकें और मुस्लिम धर्मगुरुओं और बुद्धिजीवियों की संघ प्रमुख से मुलाकातें तेजी से बढ़ी हैं। विशेष बात यह है कि संघ का यह अभिनव प्रयास उसके शताब्दी वर्ष 2024 तक संघ कार्य को देश के एक लाख स्थानों तक पहुंचाने के लक्ष्य के बीच है। बता दे कि संघ कार्य अभी देश के 60 हजार के करीब स्थानों पर है। ऐसे में संघ का जोर पूर्वाेत्तर के राज्यों और कश्मीर जैसे राज्य पर फोकस है। जहां ईसाई व मुस्लिम समुदाय की बहुल्यता है।  

आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि अखिल भारतीय इमाम संगठन के मुख्य इमाम इलियासी साहब ने मोहन भागवत को आमंत्रित किया था। इसलिए आरएसएस प्रमुख ने उनसे मुलाकात की है। आरएसएस सरसंघचालक हर वर्ग के लोगों से मिलते हैं। यह सामान्य संवाद प्रक्रिया का ही हिस्सा है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी व मामले के जानकार ने कहा कि संगठन का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसमें दूसरे संप्रदाय से लोग आ रहे हैं और संघ को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने के लिए उसको करीब से जानने की कोशिश कर रहे हैं। इन संप्रदायों में ऐसे राष्ट्रीय सोच के लोग भी हैं जो अपनी पूजा पद्धति और आस्था पर रहते हुए देशहित में साथ आकर काम करने के इच्छुक हैं। इसलिए इस तरह की व्यवस्था की जरूरत महसूस हुई है।  उन्होंने कहा कि इसके अच्छे अनुभव सामने आ रहे हैं। हालांकि परिणाम निकलने में कुछ समय अभी लगेगा। इसके साथ उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से अलग की व्यवस्था है। क्योंकि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिमों के द्वारा मुस्लिम समुदाय के लिए संगठन है।

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