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कृषि क्षेत्र में नई तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए: R G Agarwal, Dhanuka Group Chairman

प्रेस रिलीज़कृषि क्षेत्र में नई तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए:...

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मेरठ, 10 अगस्त: अग्रणी कृषि रसायन फर्म धानुका ग्रुप के चेयरमैन आर जी अग्रवाल ने आज कृषि क्षेत्र में ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीक के उपयोग की हिमायत की क्योंकि इसके उपयोग से फसल की पैदावार में सुधार होगी और किसान की लागत कम करने और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि क्षेत्र में कीटनाशकों के छिड़काव सहित विभिन्न गतिविधियों के लिए ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से ही इस ड्रोन के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलेगा।

श्री अग्रवाल ने किसानों को फसलों की उत्पादकता और उत्पादन में सुधार के लिए सही दर पर अच्छी गुणवत्ता वाले इनपुट जैसे बीज, उर्वरक और कीटनाशक प्रदान करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और भारतीय कृषि में घटिया कीटनाशकों की बड़े पैमाने पर बिक्री के बारे में बताया कि कैसे इससे फसल की उपज और किसानों की आय दोनों प्रभावित होती है।

अग्रवाल ने कृषि वस्तुओं के मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार पर भी ध्यान दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया ।

कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए, अग्रवाल ने कहा “बाजार में नकली और घटिया कृषि रसायनों की बिक्री, हम सभी के लिए चिंता का विषय होनी चाहिए” । उन्होंने कहा, “ऐसे घटिया कृषि रसायन का उपयोग मिट्टी की उर्वरता पर प्रभाव डालता है। इस तरह के खराब उत्पाद फसलों में कीटों को नियंत्रित करने में असमर्थ होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप फसलों को नुकसान होता है और किसानों की आय कम होती है।”

अग्रवाल ने किसानों को कीटनाशक खरीदते समय सही बिल लेने की सलाह भी दी। उन्होंने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से मांग की कि घटिया कृषि रसायन बेचने वाली संस्थाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए।        

अग्रवाल ने कहा कि, कंपनी ने एसीएफआई के साथ मिलकर ‘जागो किसान जागो’ अभियान शुरू किया है, जो किसानों को नकली उत्पादों के खतरों और उन्हें दूर करने के तरीकों के बारे में शिक्षित करेंगे । उन्होंने कहा, “किसानों के हित के लिए घटिया कीटनाशक और मिलावटी कृषि रसायन के खतरे से निपटना और ‘किसानों की आय को दोगुना करने’ के सरकार के उद्देश्य को सुनिश्चित करना अनिवार्य है।” अग्रवाल ने पिछले पांच दशकों में भारत के खाद्यान्न और अन्य प्रमुख फसलों के उत्पादन को बढ़ाने में कृषि रसायन क्षेत्र की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

अग्रवाल ने कहा, भारत सभी प्रमुख फसलों के उत्पादन में नंबर एक या दो है, लेकिन वैश्विक औसत की तुलना में प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बहुत कम है, । उन्होंने कहा कि उर्वरकों और कृषि रसायनों के सही उपयोग से फसल की पैदावार बढ़ाने में काफी मदद मिल सकती है।

हम भारत में प्रति हेक्टेयर उपज और कृषि-उत्पाद की मात्रा में वृद्धि करके कृषि में विकास को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं, बशर्ते नई कीटनाशकों का उचित मात्रा में उपयोग किया जाए। ये नई प्रौद्योगिकी उत्पाद हमारे किसानों को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं जो इस तथ्य से स्पष्ट है कि दुनिया भर में पंजीकृत 1,175 कीटनाशक अणुओं (दोनों रासायनिक और जैविक मूल) में से चीन में 950+, यूएसए में 1057+, पाकिस्तान और वियतनाम में 450+ हैं, जबकि भारत में उपयोग के लिए केवल 299 अणु पंजीकृत हैं। यह हमारी ढीली पंजीकरण प्रणाली, नई प्रौद्योगिकी कीटनाशकों का प्रचार न करने और नकली, अवैध, गलत ब्रांड के कीटनाशकों के उपयोग के कारण है। कृषि से भारतीय जीडीपी चीन की तुलना में लगभग 1/3 होने का यह प्रमुख कारण हैं।

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