कभी फिल्मों में देखते थे कि डाकुओं से निपटने के लिए गाँव वालों को बंदूकें दी जाती थी ताकि पुलिस की गैर मौजूदगी में डाकुओं से मुकाबला किया जा सके. डाकू तो अब नहीं, हाँ उनकी जगह अब आतंकी लेते जा रहे हैं. डाकू दौलत लूटने आते थे लेकिन यह आतंकी देश को तोड़ने के लिए हिंसा करने आते हैं और मासूम लोगों को अपना शिकार बनाते हैं. कश्मीर में आतंकियों की हिंसक घटनाओं में कोई कमी नहीं आ रही है, पिछले दिनों ही राजौरी और पूंछ इन आतंकियों ने बेगुनाहों को अपना शिकार बनाया। इन आतंकियों से निपटने में वहां तैनात जवान जहाँ लगातार आतंकियों को ढेर कर रहे हैं वहीँ अब कश्मीर के ग्रामीणों को भी इस लायक बनाये जाने का फैसला किया गया है कि वो खुद भी आतंकियों का मुकाबला कर सकें।
ग्राम विकास समितियों के साथ मिलकर चलेगा अभियान
इस सिलसिले में CRPF द्वारा ग्राम विकास समितियों के साथ मिलकर ग्रामीणों को हथियार चलाने में सक्षम बनाने की टायरी की जा रही है, CRPF के जवान गाँव वालों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देंगे, इस साथ ही गाँव वालों को SLR और स्वचालित राइफलें भी दी जाएँगी। इस अभियान की शुरूआत राजौरी जिले के धनगरी गाँव से हो चुकी है जहाँ हर एक ग्राम रक्षा समिति में एक सदस्य को SLR और कुछ ग्राम रक्षा समितियों में 2 से 3 लोगों को ऑटोमैटिक राइफलें दी गयी हैं.
अबतक 303 लोगों को हथियार दिए गए
इस सिलसिले में धनगरी गांव में सोमवार को एक स्पेशल कैम्प लगाकर 100 VDC सदस्यों को नए हथियार दिए गए, इनमें से 40 पूर्व सैनिक हैं, इसके अलावा 60 स्थानीय लोगों को भी हथियार दिए गए हैं. जानकारी के मुताबिक अबतक कुल 303 बंदूकें दी जा चुकी हैं. इस अभियान में गांव के पूर्व सैनिक अन्य लोगों को हथियार चलाने का प्रशिक्षण देंगे। बता दें कि राजौरी और श्रीनगर के जदीबल इलाके में नए साल पर आतंकियों ने कुछ हिंदू परिवारों पर फायरिंग की थी जिसमें अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है. इस हमले के बाद राजौरी में सीआरपीएफ की 18 कंपनियां तैनात कर दी गई हैं.
