टिहरी गढ़वाल- उत्तराखंड में अभी तक आपने देवी देवताओं के मंदिरों और उनकी धार्मिक महत्ता के बारे में पढ़ा होगा. लेकिन आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताते हैं जो किसी देवता का नहीं बल्कि एक आम इंसान से देव बने देवता का है. हम बात कर रहे हैं धन सिंह रथी देवता मंदिर की. धन सिंह अपने जीवन काल में लोगों की मदद और प्रेम भाव के लिए जाने जाते थे. उनका यह व्यवहार मरने के बाद भी जारी रहा. धन सिंह देवता खासकर मायके की बेटियों की मदद के लिए जाने जाते हैं जिस कारण से उन्हें ध्यानी( मायके की बेटी) का देवता भी कहा जाता है. जिसके चलते उनके भक्तों ने यहां एक छोटे मंदिर की स्थापना की. जो आज न केवल पूरे देश में बल्कि विदेशों में भी अपने भक्तों के बीच प्रसिद्ध है. हर साल अप्रैल के महीने में यहां एक बड़े मेले का आयोजन किया जाता है. जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मन्नत मांगने यहां पहुंचते हैं.
कैसे बने धन सिंह अधिकारी धन सिंह रथी देवता?
टिहरी गढ़वाल के अलएरे गांव स्थिति लिया खाल में धन सिंह रथी देवता का मंदिर स्थित है. धन सिंह अलेरू गांव के रहने वाले थे. धन सिंह अधिकारी का जन्म 18 सो 87 में एक साधारण परिवार में हुआ था. धन सिंह अधिकारी गांव में पशुपालन का काम करते थे. धन सिंह अपने व्यवहार और लोगों की मदद के लिए सभी में प्रसिद्ध थे. बताया जाता है कि एक बार गांव में हैजा जैसी घातक बीमारी फैली. जिसमें कई लोगों की मौत हुई. इस बीमारी की चपेट में धन सिंह अधिकारी भी आ गए और उनकी मृत्यु हो गई. कहा जाता है कि उस समय हैजा से मरने वाले लोगों को जलाने की जगह दफनाया जाता था. मान्यता है कि मरने के बाद भी धन सिंह अधिकारी ने लोगों की मदद करना नहीं छोड़ा. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार धन सिंह लोगों के शरीर में प्रवेश कर उनकी मदद किया करते थे. जिसके बाद लोगों को समझ आने लगा कि धन सिंह अब देव रूप में लोगों की मदद करते हैं.
मंदिर की स्थापना
हैजा से मौत के बाद धन सिंह अधिकारी अपने भक्तों की दुख तकलीफ को दूर करने लगे. उनके शुभ पुण्य कर्म के कारण धन सिंह अधिकारी को देव रूप में पूजा जाने लगा. बताया जाता है कि 1941 में धन सिंह देवता की एक भक्त ने मनोकामना पूर्ण होने पर गांव में एक छोटा मंदिर बनाया. इसके बाद धीरे-धीरे धन सिंह रथी देवता के नाम से प्रसिद्ध होने लगे और उनके भक्तों की संख्या भी बढ़ने लगी. आज धन सिंह रथी देवता ना केवल उस गांव में बल्कि देश के कोने कोने में उनके भक्त मौजूद हैं. जो यहां अप्रैल के महीने में लगने वाले बड़े मेले में शिरकत करने पहुंचते हैं.कहा जाता है कि धन सिंह रथी देवता ध्यानी का देवता है. उनके दुख कष्ट को दूर करने के लिए धन सिंह रथी देवता प्राथमिकता देते हैं.
