रणदीप हुड्डा इन दिनों अपनी वेब सीरीज इंस्पेक्टर अविनाश 2 को लेकर सुर्खियों में हैं । रणदीप का कहना है कि इस रोल को निभाना आसान नहीं था, लेकिन असली इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा से मुलाकात के बाद रोल को निभाना आसान हो गया था-
मॉनसून वेडिंग, हाईवे जैसी चुनिंदा फिल्मों से अपनी एक खास पहचान बनाने वाले रणदीप हुड्डा ने एनकाउंटर स्पेशलिस्ट ‘रेट भट्टा’ का दमदार किरदार निभा यह बता दिया है कि वह एक वर्सेटाइल ऐक्टर हैं। रणदीप उन ऐक्टर्स में गिने जाते हैं जो अपने किदारों को पर्दे पर परिपक्व बनाने के लिए कुछ भी कर गुजरते हैं। फिल्म सरबजीत के लिए रणदीप ने 28 दिन में 18 किलो और फिल्म सावरकर_के लिए 18 दिन में 26 किलो वजन घटा लिया था। वहीं इंस्पेक्टर अविनाश सीरीज में रणदीप ने ‘रेट भट्टा’ बनने के लिए 8 किलो वजन बढ़ाया, 6 महीने तक मूंछें नहीं काटीं और आवाज में भारीपन लाने के लिए विशेष डाइट व ट्रेनिंग भी ली और इस सीरज ने सफलता के कई आयाम तय किए। इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 1 की सफलता के बाद एक बार फिर रणदीप सीजन 2 में दर्शकों का दिल जीत लिया है। रणदीप हुड्डा स्टारर क्राइम थ्रिलर ‘इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 2’ दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है। जियो स्टूडियोज द्वारा निर्मित और नीरज पाठक द्वारा निर्देशित इस सीरीज के सीजन 2 के प्रमोशन के लिए रणदीप पिछले दिनों लखनऊ में मौजूद थे। इस मौके पर उन्होंने अपने और लखनऊ कनेक्शन पर खुल कर बात की थी।
अपना सा लगता है यह शहर
इंस्पेक्टर अविनाश सीरीज के अलावा लखनऊ में पहले भी कई और प्रोजक्ट्स की शूटिंग कर चुके रणदीप कहते हैं कि मैं अपने काम के सिलसिले में कई बार लखनऊ आया हूं। यहां की कई गलियों में मैंने शूटिंग की है। यह कह सकता हूं कि यह शहर मेरी कर्मभूमि है। यहां के लोगों की बोली, यहां का खाना और मेजबानी लाजावाब है। जब भी आता हूं यह शहर मुझे अपना अपना सा लगता है। जहां तक सवाल इस सीरीज के लिए तैयारी का है तो मैंने इस किरदार में ढलने के लिए कई दिन असली एसटीएफ अफसरों के गुजारे। लखनऊ की गलियों में रात में गश्त की। तब समझा कि खाकी वर्दी की जिम्मेदारी क्या होती है। एनकाउंटर से पहले हाथ कांपते हैं, पर चेहरा सख्त रखना पड़ता है, यही बारीकी पकड़नी थी।
सोचने पर मजबूर था
इस सीरीज में मैंने जिस पुलिस इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा का किरदार निभाया है, वो एक रियल लाइफ कैरेक्टर पर आधारित है। जब मुझे इस किरदार के बारे में बताया गया था तो मुझे काफी सोचना पड़ा था। शुरू में मुझे इस किरदार को समझने में मुश्किल लगी लेकिन मेरी सोच तब बदली, जब मेरी मुलाकात असली इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा से हुई। रणदीप का कहना है कि शूटिंग के दौरान असली इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा भी इस प्रोजेक्ट से जुड़े रहे। वह कई बार लखनऊ और मुंबई के सेट पर पहुंचे और शूटिंग को करीब से देखा। इस दौरान उनके साथ लगातार बातचीत होती रही जिससे मुझे अपने किरदार को और गहराई से समझने का मौका मिला। रणदीप का मानना है कि किसी भी रियल लाइफ कैरेक्टर को निभाने के लिए सिर्फ स्क्रिप्ट पढ़ लेना काफी नहीं होता। उस इंसान की जिंदगी, अनुभव और व्यक्तित्व को समझना भी उतना ही जरूरी होता है।
शूटिंग का रोचक किस्सा
रणदीप कहते हैं कि इस सीरीज की शूटिंग के दौरान का यह किस्सा मुझे हमेशा याद रहता है। हम अमीनाबाद में शूटिंग कर रहे थे तभी एक स्थानीय पानवाला दौड़कर आया और बोला, “साहब, चौराहे पर लड़के लड़कियां छेड़ रहे हैं। हमारी यूनिट के लोग हैरान रह गए। तब मैंने उसे हंसते हुए जवाब दिया, “भैया, मैं एक्टर हूं, हमारी शूटिंग चल रही है। _रेट भट्टा कोई सुपरहीरो नहीं है। वो सिस्टम का हिस्सा है, पर सिस्टम से सवाल भी करता है। सीजन 1 में वो बाहरी दुश्मनों से लड़ रहा था। सीजन 2 में सिस्टम के अंदर की गंदगी से लड़ रहा है।
इस मुलाकात के बाद मेरे लिए किरदार को समझना आसान हो गया था।रणदीप ने बताया कि उन्होंने इंस्पेक्टर अविनाश के बोलने का तरीका, लोगों से मिलने-जुलने का अंदाज, सोचने का तरीका और मुश्किल हालातों को संभालने के तरीके को बारीकी से ऑब्जर्व किया।
अच्छी पत्नी के गुण सीखने को मिले हैं
इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 2 का हिस्सा बनीं उर्वशी रौतेला ने कहा, _”इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 2 पहले से कहीं ज्यादा बड़ा, बोल्ड और एक्सप्लोसिव है। एक्शन, इमोशन और अनएक्सपेक्टेड ट्विस्ट से भरी कहानी का हिस्सा बनना एक कमाल का सफर रहा है। हर सीन इंटेंसिटी को अगले लेवल पर ले जाता है। जहां तक सवाल मेरे किरदार का है तो एक ऐसी पत्नी का किरदार है जो हर कदम पर पति का सपोर्ट करती है, 24 घंटे उसका पति का याल रखती है। मुे लगता है एक आदर्श पत्नी कैसी होनी चाहिए यह सब मुझे सीखने को मिला है अपने किरदार से। जहां तक सवाल वेब सिरीज और फिल्मों में काम करने के अंतर का है तो मैं समती हूं बॉलीवुड हो, टेलीवुड या फिर वेब सीरीज सब में काम करना एक जैसा ही होता है हम कलाकारों के लिए।
नब्बे के दशक के माहौल को सेट किश गया है
दूसरे सीजन के लिए अपना एक्साइटमेंट शेयर करते हुए डायरेक्टर नीरज पाठक कहते हैं कि सीजन 2 पहले सीजन की हर चीज को लेकर उसे कहीं ज्यादा विस्फोटक जगह पर ले जाता है। अविनाश अब सिर्फ क्रिमिनल्स के खिलाफ नहीं है, वो एक ऐसे सिस्टम के खिलाफ है जो उसके चारों ओर ढह रहा है। हमने एक्शन को बढ़ाया है, लेकिन उससे भी जरूरी, हमने इमोशनल कॉन्फ्लिक्ट को गहरा किया है, क्योंकि इस बार लड़ाई जितनी बाहरी है उतनी ही पर्सनल भी है। इंस्पेक्टर अविनाश को 1990 के दशक के उत्तर प्रदेश के उथल-पुथल भरे माहौल में सेट है। नया सीजन इंटेंसिटी को और बढ़ाता है जब इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा खुद को ऐसे तूफान में फंसा पाता है जो जितना पर्सनल है उतना ही पॉलिटिकल भी। अपने बेटे के एक मर्डर केस में फंसने और शादी के टूटने की कगार पर होने के साथ, अविनाश एक ऐसी लड़ाई में धकेल दिया जाता है जो बैज से कहीं आगे की है।
