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Ramadan 2022 Special: रमजान में जब रात को होती है सुबह की चमक

Zeba Hasan

अंधेरी रातों में जिन सडक़ों पर हमेशा सन्नाटा पसरा रहता था, लोग घरों में चैन की नींद ले रहे होते थे और जायके के वह ठिकाने, जहां रात के 12 बजे के बाद धुआं नजर नहीं आता था, वहां का नजारा इन दिनों कुछ बदला-बदला सा है। यह असर रमजान के पाक महीने का है। जैसे-जैसे ईद करीब आ रही है, शहर की फिजाओं में ऐसी रौनक नजर रही है कि मानों रात हुई ही नहीं। कहीं बच्चों की टोलियां बाजार की सैर करती नजर आ रही हैं तो कहीं महिलाओं की टोली। खास बात तो यह है कि सिर्फ मुस्लिम कम्यूनिटी ही नहीं बल्कि हर धर्म के लोग इस रौनक का हिस्सा बनते हैं। हालांकि कोरोना महामारी के चलते दो साल बाद रमजान की यह रौनक नजर आई है। वैसे तो यह सिलसिला हमेशा से ऐसा ही चला आ रहा है।

Image Credit: Naeem Ansari

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नहारी कुल्चे का स्वाद तो रमजान में ही है

अमीनाबाद में रहने वाले कमल श्रीवस्तव बताते हैं कि मैं नानवेज का शौकीन हूं, लेकिन नहारी कुल्चे का स्वाद तो रमजान में ही आता है। मेरे मुस्लिम दोस्त सहरी के लिए रात में मुबीन की नहारी खाने के लिए जाते हैं। मैं भी उनके साथ पहुंच जाता हूं। कभी हम कबाब  खाते हैं तो कभी बिरयानी का जायका हम सब मिलकर उठाते हैं। अगर कुछ खाना ना भी हो तब भी  मैं कभी कभी सिर्फ रात में घूमने के लिए निकलता हूं, क्योंकि रमजान में रातों की रौनक बहुत ही शानदार होती है। पूरी रात लोग बस बाजार में घूम-धूम कर खरीदारी करते हैं।

Image Credit: Naeem Ansari

महिलाएं और बच्चे भी कम नहीं

रोजे में दिन भर इबादत और घर के कामों में बिजी रहने वाली महिलाएं भी सारे काम से फारिग होकर रात में ही निकलती हैं। किसी को इफ्तारी और सहरी के लिए खरीदारी करनी होती है तो कोई बच्चों को बाजार की रौनक दिखाने के लिए ले जाती हैं। स्कूल टीचर शामीन खान बताती हैं कि इन दिनों पूरा परिवार ही रोजा रहता है। ऐसे में स्कूल जाना फिर घर आकर इफ्तारी का इंतजाम करना दिन में कहीं आने जाने का वक्त ही कहां मिल पाता है। शाम की नमाज और खाने के बाद हम बाजार के लिए निकलते हैं। अगर कुछ खरीदना नहीं भी है तो मार्केट घूमना बहुत अच्छा लगता है।

Image Credit: Naeem Ansari

सभी धर्म के लोग आते हैं

नजीराबाद की वाहिद बिरयानी के आबिद अली बताते हैं कि मैं बचपन से देख रहा हूं कि रमजान में रातों की रौनक देखने के लिए दूर-दूर से लोग पुराने लखनऊ का रुख करते हैं। आज भी जब जैसे-जैसे रमजान आगे बढ़ता है, रातों की रौनक बढ़ती जाती है। कोई कश्मीरी चाय पीने के लिए निकलता है तो कोई बिरयानी खाने के लिए। यह सिलसिला चांद रात तक चलता है। 

Image Credit: Naeem Ansari

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Image Credit: Naeem Ansari

चूड़ी वाली गली में ‘ट्रैफिक जाम’

अरे भाई ट्रैफिक क्यों जाम कर रखा है निकलने के लिए थोड़ी जगह तो दो…नक्खास स्थित चूड़ी वाली गली में इन दिनों ऐसी ही आवाजें सुनाई दे रही हैं। दरअस्ल ईद यानी सूट के मैचिंग की नई चूड़ी पहनने का दिन भी है महिलाओं के लिए। यही वजह है कि बेस्मेंट में बनी चूड़ी वाली गली इन दिनों जगमगा रही है। इस पूरी मार्केर्ट पर महिलाओं का कब्जा हो चुका है। किसी को सूट की मैचिंग की चूड़ी चाहिए तो किसी को शरारे की मैचिंग की चूड़ी। रात में भी दिन का अहसास कराने वाली इस चूड़ी मार्केट में श्रंगार के और भी सामान मिलते हैं। यही वजह है कि ईद की शॉपिंग में महिलाएं इस मार्केट में जाना नहीं भूलती हैं।  

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