लखनऊ नवाबों के शहर के साथ नफासत और नज़ाकत का भी शहर माना जाता है, आज यह नफासत और नज़ाकत शहर में हुई मुख़्तसर सी बारिश में भी नज़र आयी. कुछ हवा के झोंके आये और अपने साथ बादलों में भरा हुआ थोड़ा सा पानी भी. बारिश भी ऐसी जैसे कह रही हो कि पहले आप पहले आप मतलब हौले हौले धीरे धीरे, कभी बलखाई जवानी की दिलकश अंगड़ाई का तेज़ झोंका भी.
कहने का मतलब ऐसी बारिश जिसने किसी को ऐसा तरबतर भी नहीं किया कि गीले कपड़ों में वह शर्म से लाल हो जाय. ऐसी बारिश जो मौसम की तपिश को थोड़ा ठहरने का सन्देश दे गयी, ऐसी बारिश जिससे लोग परेशान नहीं लुत्फ़अन्दोज़ हो जाएँ, ऐसी बारिश जिससे सड़कें लबरेज़ होकर सरकार की असली सूरत को ज़ाहिर न करें, ऐसी बारिश जिससे लोग पीछा छुड़ाने की कोशिश न करें।
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जी हाँ कुछ इसी अंदाज़ की बारिश आज लखनऊ में हुई और मौसम को खुशगवार कर गयी. तपती झुलसती गर्मी से अगर ज़्यादा नहीं तो कुछ निजात ज़रूर दिला गयी. बारिश के मौसम की बारिश अक्सर जहाँ रुलाती हैं वहीँ मौसमे गरमा की आसमानी बूँदें भले ही सहरा में पानी की कुछ क़तरे टपकने जैसे हों पल राहत का एहसास तो ज़रूर दिला जाते हैं. आखिर में इतना ही कि इस तरह की बारिश को कुदरत की रज़ा समझिये और जितने भी खूबसूरत पर मिलें उनका मज़ा लीजिये।
बाक़ी तस्वीरों में मुलाहेज़ा फरमाइए।
