Site icon Buziness Bytes Hindi

Uttarpradesh News Today: शराब की तस्करी ने उड़ाई आबकारी विभाग की नींद,लखनऊ तक पहुंची गूंज

मेरठ। अवैध शराब की तस्करी ने आबकारी विभाग की नींद उड़ा दी है। मेरठ जोन के प्रत्येक जिले में राजस्व कम होने से लखनऊ तक अधिकारियों की नींद उड़ गई। बता दें कि प्रदेश में आबकारी विभाग को मेरठ जोन से सबसे अधिक राजस्व मिलता है। अधिकारियों ने अब शराब तस्करों पर लगाम लगाने के लिए प्रयागराज, बरेली, मुरादाबाद, आगरा आदि जनपदों से टीमें बनाकर मेरठ जोन में मदद के लिए भेजी हैं। जोे कि अब पश्चिमी उप्र के जिलों में हो रही शराब की तस्करी को रोकने का काम करेंगी। बता दें कि मेरठ जोन में आबकारी विभाग को दो तरफ से कड़ी चुनौती मिल रही है।

Read also: नाबालिगों की तस्करी के आरोप में 2 आरोपियों को 14 साल कैद की सजा

एक तरफ दिल्ली में सस्ती शराब का बिकना तो दूसरी ओर हरियाणा से अवैध शराब की तस्करी। इन दोनों ही चुनौतियों से निपटने के लिए आबकारी विभाग का मुख​बिरी तंत्र कमजोर हो गया है। मुखबिर तंत्र कमजोर होने से विभाग को इन दो राज्यों से आ रही शराब को रोक पाना कड़ी चुनाती बना हुआ है। आबकारी इंटेलींजेस के संयुक्त कमिश्नर आरएम त्रिपाठी के नेतृत्व में अब टीमें एनसीआर से पश्चिमी उप्र के जिलों में हो रही शराब की तस्करी को रोकने के लिए पहुंचीं हैं। इन्होंने जिलेे की टीमों को साथ लेकर दिल्ली—मेरठ एक्सप्रेस वे और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर तस्करी की शराब की बड़ी खेप पकड़ी है। बता दें कि बा​हर की टीमे जब ​तक जिले में रहती हैं।

Read also: ईरानी नौसेना ने तट से 150,000 लीटर तस्करी का ईंधन किया जब्त

तभी तक आबकारी निरीक्षक भी अलर्ट रहते हैं। अधिकारियों के मुताबिक तस्करों की धरपकड़ रोकने के लिए दिल्ली—मेरठ एक्सप्रेसवे पर शाम पांच बजे से लेकर रात 11 बजे तक आबकारी इंस्पेक्टरों की ड्यूटी होती है। जो काशी टोल प्लाजा और अन्य संवेदनशील जगहों पर रूककर दिल्ली से आने वाले वाहनों की चेंकिग करते है। ये टीम प्रतिदिन तीन सौ से अधिक वाहनों की चेकिंग करती है। इसके बाद भी शराब तस्करी नहीं रूक रही है।

Exit mobile version