कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों ने 8 जून को राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया। बैठक के बाद पार्टी नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा, “सीडब्ल्यूसी ने सर्वसम्मति से राहुल गांधी से लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद संभालने का अनुरोध किया। संसद के अंदर इस अभियान का नेतृत्व करने के लिए वह सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं।” 2014 में सत्ता से बेदखल होने के बाद यह पहली बार होगा जब कांग्रेस को लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद मिलेगा। पिछले 10 वर्षों में यह पद पाने में विफल रही क्योंकि 2014 और 2019 दोनों में सदन में इसकी सीटों की संख्या कुल सीटों के अपेक्षित 10 प्रतिशत से कम थी।
वेणुगोपाल ने कहा की कांग्रेस पार्टी का मानना है कि इस चुनाव के दौरान हमने बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक न्याय सहित कई ज्वलंत मुद्दे उठाए। इन मुद्दों को अब संसद के अंदर भी अधिक प्रभावी ढंग से संबोधित करने की आवश्यकता है। इसलिए, सीडब्ल्यूसी का विचार है कि राहुल गांधी इसके लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं। उन्होंने बताया कि राहुल गाँधी ने नेता विपक्ष की ज़िम्मेदारी लेने से इंकार नहीं किया है लेकिन सोचने के लिए कुछ समय माँगा है. बता दें कि शाम को कांग्रेस संसदीय दल की बैठक है जिसमें नेता विपक्ष के बारे में फैसला हो सकता है
इसके अलावा एक बड़ा सवाल राहुल गाँधी कहाँ से सांसद बने रहेंगे इसपर भी फैसला होना है. कहा जा रहा है कि इस मुद्दे पर केरल और यूपी के नेताओं में बैठक के दौरान खींचतान रही जिसकी वजह से फैसला नहीं हो सका लेकिन कांग्रेस सूत्रों से जो खबर आ रही उसके मुताबिक राहुल गाँधी वायनाड सीट छोड़ेंगे और रायबरेली को पास में रखेंगे। वेणुगोपाल ने इस बारे में बताया कि इसपर फैसला 17 june से पहले हो जायेगा. राहुल गाँधी अगर LoP बनने पर राज़ी हो गए तो होने वाले प्रधानमंत्री मोदी को पहली बार किसी नेता विपक्ष का सामना करना पड़ेगा।
