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Gujarat Chunavi Dangal :- आदिवासी सत्याग्रह रैली के बहाने राहुल संभालेंगे अपना वोट बैंक

Gujarat Chunavi Dangal – गुजरात विधानसभा चुनाव जैसे जैसे नज़दीक आ रहे हैं, आदिवासी समाज राजनीतिक पार्टियों का चहेता बनता जा रहा है, पहले मोदी ने अपने गुजरात के तीन दिवसीय दौरे पर डोरे डाले, उनसे अपने गहरे रिश्तों की याद दिलाई, फिर पंजाब में मिली जीत के उत्साह से लबरेज़ आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल आदिवासियों को लुभाने पहुंचे और बताया कि गुजरात में सबसे पहले आप लोगों से ही मिलने आया हूँ, और अब कांग्रेस के सबकुछ राहुल गाँधी 10 मई को गुजरात में आदिवासी सत्याग्रह रैली करने जा रहे हैं।  

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गुजरात में विधानसभा चुनाव की चर्चाओं के बीच कांग्रेस पार्टी की यह पहली सकारात्मक राजनीतिक सरगर्मी होगी, राहुल गाँधी दादोह में यह रैली करेंगे, इस रैली के माध्यम से वह अपने परंपरागत आदिवासी वोट बैंक को एकजुट रखने की कोशिश करेंगे। बता दें कि भाजपा हर चुनाव में जीत का एक टारगेट रखती है, इसबार उसने 150+ का लक्ष्य रखा है और इस लक्ष्य को पाने के लिए उसे कांग्रेस पार्टी के वोट बैंक में सेंधमारी करनी ज़रूरी है. शायद इसीलिए पाटीदारों की लड़ाई और पीके की उलझनों के बीच राहुल गाँधी का यह चुनावी कार्यक्रम रखा गया है. राज्य कांग्रेस को डर है कि जिस तरह मोदी और केजरी ने आदिवासियों को लेकर राजनीति करनी शुरू की है उससे उनका ठोस वोट बैंक छिटक न जाय. 

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खबर यह भी है कि इस दौरे पर वह हार्दिक पटेल को लेकर भी कोई फैसला ले सकते हैं, फिलहाल कांग्रेस खेमे से उनको मनाने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं, समस्या यह है कि अभी हार्दिक को मनाने के लिए दिल्ली से राज्य नेतृत्व को ही ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है और हार्दिक पटेल की नाराज़गी सोनिया, राहुल या प्रियंका से नहीं बल्कि राज्य में पार्टी के आला ओहदों पर बैठे लोगों से है, हार्दिक की शिकायत है कि कार्यवाहक अध्यक्ष होने के बावजूद उन्हें नज़रअंदाज़ किया जा रहा है, उन्हें कोई ज़िम्मेदारी नहीं सौंपी जा रही है.

हार्दिक को शायद राहुल के इस दौरे की पहले से जानकारी हो और इसलिए उन्होंने दबाव की रणनीति के तहत ट्विटर के बायो से कांग्रेस पार्टी का नाम हटाया हो. फिलहाल हार्दिक ने आज कोई ट्वीट नहीं किया है इसलिए कुछ कयास लगाना मुश्किल है. राहुल के 10 मई के कार्यक्रम को कांग्रेस के चुनावी अभियान की शुरुआत माना जायेगा और अब भाजपा व AAP की तरह उसका भी चुनावी अभियान पटरी पर आ सकता है, हालाँकि अभी समस्याएं बहुत सी सुलझानी बाकी हैं.

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