उबैद उल्लाह नासिर
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की हिदायत पर पहल करते हुए पंजाब की कांग्रेसी सरकार ने किसानों के हित में तीन नए कानून विधान सभा से पारित करा के गवर्नर के पास मंज़ूरी के लिए भेज दिए हैं इस प्रकार मोदी सरकार ने कोर्पोरेट के कथित दबाव में कृषि सुधार के नाम पर जो तीन नए कानून बनाये थे और जिसके कारण देश भर के किसान प्रोटेस्ट में सड़कों पर आगये थे और बीजेपी की सब से पुरानी सहयोगी अकाली दल ने उसका साथ छोड़ दिया उस से किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई हो गई है I ध्यान रहे की मोदी सरकार द्वारा बनाये गए इन कानूनों के खिलाफ सभी विपक्षी दल लामबंद हैं और देश भर के किसान जबरदस्त विरोध कर रहे है I श्रीमती सोनिया गाँधी ने कांग्रेस शासित मुख्यमंत्रियों को हिदायत दी थी की कृषि चूँकि राज्य सरकारों से सम्बन्धित मामला है इस लिए किसानों के हितों की रक्षा के लिए वह अपने यहाँ अलग कानून बनाये Iपंजाब के मुख्य मंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने पहल करते हुए तीन नए कृषि कानून बनाये हैं जिन्हें वास्तव में क्रांतिकारी कहा जा सकता है जिसके द्वारा पहली बार सरकार द्वारा मंज़ूर किये गए न्यूनतम सहारा मूल्यों (MSP) को कानूनी संरक्षण दिया गया है I विधान सभा में यह बिल सर्वसम्मति से मंज़ूर हुआ है यहाँ तक कि कांग्रेस की धुर विरोधी श्रोमणी अकाली दल आम आदमी पार्टी के और बीजेपी के विधायकों ने भी इसका समर्थन कियाI बिल पारित होने के बाद कैप्टेन अमरिंदर सिंह सभी विधायकों के साथ राज भवन पहुंचे और बिल की कॉपी राज्यपाल को सौंपी बिल को पहले राज्यपाल द्वारा और फिर राष्ट्रपति द्वारा मंज़ूरी मिलने के बाद ही यह कानून बन सकेगाI कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने आगाही दी है कि यदि राज्यपाल या केंद्र सरकार द्वारा इस बिल को मंज़ूर करने में अड़ंगे लगाए गए तो वह कानूनी कार्रवाई करेंगे I पंजाब के इस कानून के लागू होने के बाद अब यदि कोई व्योपारी धान और गेहूं सरकारी मूल्य से कम पर किसानों से खरीदारी करेगा तो उसे कम से कम तीन साल की सज़ा होगी I दर असल किसानों की मुख्य मांग यही है की MSP को कानूनी हैसियत दी जाए और सरकार उनकी पूरी उपज की खरीदारी सुनिश्चित करे I अब तक होता यह रहा है की सरकार न्यूनतम सहारा मूल्य तो घोषित कर देती है लेकिन खरीदारी का कोई उपयुक्त बंदोबस्त नहीं करती जिससे किसान अपनी उपजा सस्ते मूल्य पर बिचोलियों को बेचने पर मजबूर हो जाता है और phir बाद में यही बिचौलिए वह गल्ला सरकार को या कम्पनियों को ही सरकारी मूल्य पर बेच कर करोरों का वारा न्यारा करते हैं जैसे आज कल उत्तर प्रदेश में धान की फसल कट कर आयी है सरकार ने न्यूनतम सहारा मूल्य 1800/- प्रति क्विंटल निर्धारित किया है लेकिन किसान 1000-1100/- पर बेचने को मजबूर है क्योंकि अव्वल तो सरकारी खरीदारी बहुत देर से शुरू हुई फिर खरीदारी केंद्र दूर दूर बनाये गए हैं I किसानों विशेषकर छोटे किसानों को अपना माल इतनी दूर ले जाना फिर वहां सरकारी अमले के तरह तरह के एतराज़ कभी धान में नमी होना कभी साफ़ न होना आदि बता कर उन्हें वापस जाने पर मजबूर कर देता है इन सब झंझटों से बचने के लिए किसान अपना धान औने पौने बेचने पर मजबूर है बहुत से किसानों ने बताया की उनके पास 200-300 क्विंटल धान है मगर रेट वही 1000-1100 मिल रहे है इस लिए अभी तक नहीं बेचा है लेकिन कुछ दिनों बाद मजबूरन बेचना पड़ेगा क्योंकि एक तो अगली बोवाई के लिए और घरेलु खर्च के लिए पैसे की ज़रुरत है दुसरे ज्यादा दिन तक खुले में रखने से धान खराब हो जायेगा और कहीं यदि बदकिस्मती से पानी बरस गया तो सब कुछ मिटटी में मिल जायेगा I MSP की कानूनी हैसियत के बाद उनका यह मसला हल हो जाएगा I वास्तव में 2013 मनमोहन सरकार द्वारा पारित भूमि अधिग्रहण कानून के बाद किसानों के हित में यह दूसरा बड़ा क़दम है जो कांग्रेस की सरकार ने उठाया है I प्राप्त सूचनाओ के अनुसार छत्तीस गढ़ और राजस्थान सरकारों ने ऐसे ही कानून बनाने के लिए अपनी विधान सभाओं का सत्र बुलाने के लिए गवर्नर को लिखा है लेकिन मोदी सरकार द्वारा नियुक्त किये गए गवर्नर हीला हवाली से काम लेने लगे हैं हालांकि संविधान के अनुसार मंत्री मंडल द्वारा प्रस्ताव मंज़ूर किये जाने के बाद उन्हें सत्र बुलाने में आना कानी नहीं करना चाहिए लेकिन मोदी सरकार द्वारा नियुक्त किया गया कोई भी गवर्नर संवैधानिक मान मर्यादाओं का पालन नहीं कर रहा है तो यह दोनों भी क्यों करें ?
न्यूनतम सहारा मूल्य के अलावा पंजाब सरकार ने तीन अन्य कानून भी पारित किये हैं जो केंद्र द्वारा पारित किये गए कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ है इनमें दूसरा सब से महत्त्व पूर्ण है स्टॉक रखने के सम्बन्ध में पुराने आवश्यक वास्तु कानून को बहाल करना यानी पंजाब में कोई व्योपारी काला बाजारी और जमा खोरी के लिए जितना चाहे गल्ले का उतना स्टॉक नहीं रख सकता ऐसा करने पर उसके खिलाफ पुराने कानून के तहत ही कार्रवाई की जायेगी I इसके अलावा छोटे किसानों को राहत देने के लिए उनकी ढाई एकड़ तक की जमीन बंधक नहीं रखी जा सकती इससे किसानों को बैंकों द्वारा प्रताड़ित किये जाने और उनकी जमीन अटेच किया जाने से मुक्ति मिल गयी है इस से पहले किसानों के बैल मवेशी ट्रेक्टर आदि अटेच करने पर पाबंदी थी लेकिन जमीन अटेच की जा सकती थी अब छोटे किसानों की जमीन भी अटेच नहीं की जा सकती यह किसानों के बहुत राहत की बात है I
मोदी सरकार द्वारा पारित कानूनों को रद्द कर के नायदे कानून बनाने पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने कहा की वह अपना इस्तीफ़ा हर समय अपने जेब में रखते हैं उनको अपनी सरकार बर्खास्त किये जाने तक का भी डर नहीं है वह किसानों के हक की लड़ाई के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार है उन्होंने ने कहा की अगर किसानों की समस्याओं का समाधान न किया गया तो किसान सड़कों पर होंगे और दुश्मन देश हमारी स्थिति का फायदा उठा सकते हैं I अब गेंद बीजेपी के पाले में है अगर गवर्नर ने अड़ंगे बाज़ी की तो इसका सियासी खम्याज़ा बीजेपी को चुनाव में भुगतना पड़ सकता है अतःकिसान हित और पार्टी हित में बीजेपी नेत्रित्व को गवर्नरों को हिदायत देनी चाहिए की वह अड़ंगे बज्जी से बाज़ आयें और विधान सभा से पारित कानूनों को अपनी मंज़ूरी दे दें I

