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Bilkis Bano Gang Rape Case: राहुल गांधी के बाद अब प्रियंका गांधी बिलकिस बानो के दोषियों की रिहाई पर हमलावर, पीएम मोदी को ट्वीट कर मांगा जवाब

नई दिल्ली। गुजरात सरकार द्वारा बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों को जेल से रिहा कर दिया गया है। इसके बाद से विपक्ष लगातार भाजपा को घेरने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर है। पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी से इस मसले पर जवाब मांगा था। अब कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर मोदी से जवाब मांगा है। प्रियंका गांधी ने लिखा है कि ‘‘बलात्कार की सजा पा चुके 11 लोगों की रिहाई, कैमरे पर उनके स्वागत-समर्थन में बयानबाजी पर चुप्पी साधकर सरकार ने अपनी लकीर खींच दी है। लेकिन देश की महिलाओं को संविधान से आस है। संविधान अंतिम पंक्ति में खड़ी महिला को भी न्याय के लिए संघर्ष का साहस देता है। बिल्किस बानो को न्याय दो।’’

इससे पहले कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी ने भी बुधवार को गुजरात के बिलकिस बानो मामले के दोषियों की रिहाई को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने कहा था कि पूरा देश उनकी बातों और कामों में अंतर देख रहा है। उन्होंने पूछा कि ऐसे फैसलों से देश की महिलाओं को आखिर क्या संदेश जा रहा है। राहुल गांधी ने ट्वीट किया था कि छह महीने की गर्भवती महिला से दुष्कर्म और उनकी तीन वर्ष की बच्ची की हत्या करने वालों को ‘आज़ादी के अमृत महोत्सव’ के दौरान रिहा कर दिया गया। नारी शक्ति की झूठी बातें करने वाले देश की महिलाओं को क्या संदेश दे रहे हैं। प्रधानमंत्री जी, पूरा देश आपकी कथनी और करनी के अंतर को देख रहा है। राहुल गांधी के साथ ही अब प्रियंका ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछा है। प्रियंका ने ट्वीट किया कि एक गर्भवती महिला के साथ गैंगरेप और उसकी बच्ची की हत्या जैसे अपराध में सभी अदालतों से सजा पा चुके अपराधियों की भाजपा सरकार द्वारा रिहाई, कैमरे के सामने स्वागत। क्या अन्याय व संवेदनहीनता की पराकाष्ठा नहीं है ये। 

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वहीं कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बयान जारी कर कहा कि दोषियों की रिहाई से जुड़े कुछ और तथ्य सामने आए हैं। खेड़ा ने कहा कि गुजरात सरकार ने दावा किया है कि उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ही अभियुक्तों को रिहा किया। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को तीन महीने के भीतर रिहाई पर विचार करने को कहा है। इसलिए दुष्कर्म एवं हत्या के अभियुक्तों को रिहा करने का फैसला कार्यपालिका का है। पवन खेड़ा ने पूछा कि किस नीति के तहत फैसला लिया गया है। इसको लेकर पवन खेड़ा ने सवाल किया कि गुजरात सरकार ने 1992 की नीति के तहत रिहाई का फैसला लिया। लेकिन सच्चाई ये है कि 2013 में इस नीति को गुजरात में समाप्त कर दिया गया है। गुजरात सरकार की ऑफिशियल वेबसाइट पर 1992 की नीति का कोई जिक्र नहीं।

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