कांग्रेस का काला विरोध, चर्चा में प्रियंका

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केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी के आज के प्रदर्शन में जोश भी दिखा और दम भी नज़र आया. आम तौर पर कांग्रेस पार्टी के विरोध प्रदर्शनों में राहुल गाँधी ही चर्चा का केंद्र बनते रहे हैं लेकिन आज का विरोध प्रदर्शन कई मायनों में कुछ अलग था. इसबार बाज़ी राहुल ने नहीं बल्कि उनकी बहन प्रियंका ने मारी। विरोध का उनका स्टाइल, उनका बैरिकेड पर चढ़ना और फिर कूदना, ज़मीन पर किसी सीज़न्ड आंदोलकारी की तरह जम जाना, मौका मिला तो महिला पुलिसकर्मी का हाथ भी मरोड़ना, हिरासत में लिए जाने पर संघर्ष करते हुए नज़र आना. सबकुछ प्रियंका वाड्रा को दूसरे कांग्रेसियों से अलग दिखा रहा था. प्रियंका को पुलिसकर्मी जिस तरह टांग कर ले जा रहे थे, बड़ी मशक्कत करनी पड़ी उन्हें प्रियंका को गाड़ी तक ले जाने के लिए. मीडिया का भी आज विशेष फोकस प्रियंका पर ही था. काली सलवार कमीज में सुरमई सड़क पर धरने पर बैठी प्रियंका गाँधी की तस्वीर सोशल मीडिया पर आज की सबसे ज़्यादा देखी जाने वाली तस्वीर थी. पुलिसकर्मियों का उन्हें घसीटते हुए ले जाने वाला वीडियो भी वायरल वीडियो में शामिल रहा. 

कांग्रेस के आज के प्रदर्शन की एक ख़ास बात आज काले कपडे भी थे. काले रंग का चुनाव भी शायद कुछ सोच समझकर ही किया गया होगा। वैसे तो काला रंग नकारात्मकता की निशानी माना जाता है, शायद इसलिए जब गुस्सा दिखाना हो तो इस रंग का उपयोग भी किया जाता है. कांग्रेस पार्टी भी गुस्सा है , राहुल और प्रियंका भी गुस्सा हैं. 70 साल में बने देश को सिर्फ आठ साल में बर्बाद करने बात कांग्रेस कर रही है. यह सही है कि देश में बेरोज़गारी हो या मंहगाई, अपने चरम पर है, ऊपर से दूध दही जैसी चीज़ों पर GST की मार से गरीब और बेहाल है लेकिन सरकार है कि बेशर्मी से कह रही है कि “मंहगाई है कहाँ”. देश की वित्तमंत्री रसातल में जा रहे रूपये को मज़बूत बता रही हैं, आवशयक वस्तुओं पर 5% के GST का ठीकरा राज्यों पर फोड़ रही हैं, कह रही हैं कि किसी ने विरोध ही नहीं किया। आपने किसी को विरोध के काबिल छोड़ा ही कहाँ. मैडम सदन में मंहगाई की बात को मानने से शर्माती भी नहीं हैं. 

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वैसे शायद वो सही भी हैं. जिस देश में आधे घंटे के अंदर एक लाख से ज़्यादा नई स्कार्पियो एन की बुकिंग हो जाय, सच में मंहगाई की बात बेमानी सी लगती है मगर जब हम उस खबर को पढ़ते हैं जिसमें एक छोटी बच्ची ने प्रधानमंत्री मोदी जी को पत्र लिखकर बताती है कि पेंसिल मांगने पर उसकी माँ उसको डांटती है क्योंकि पेंसिल भी मंहगी हो गयी है (GST लगने के कारण) तो मोदी जी को पता नहीं आती है कि नहीं पर मुझ समेत देश के बहुत से नागरिकों को शर्म ज़रूर आयी. दही और पनीर पर GST लग गया, मीम्स बनने लगे, सोशल मीडिया पर एक मज़ाक सा बन गया. ये कहाँ जा रहे हैं हम. 

खैर हम भी कहाँ से कहाँ पहुँच गए. बात हो रही थी काले लिबास में कांग्रेस के विरोध और प्रियंका गाँधी की. देश भटका हुआ है तो हमारा भी विषय से भटकना कोई हैरानी वाली बात नहीं है. बहरहाल यह भी एक संयोग है कि इन दिनों मुहर्रम का महीना चल रहा है, ग़म का महीना है और काले कपड़ों से गहरा ताल्लुक भी है. कांग्रेस भी गम में डूबी हुई है, देश की मंहगाई के गम में, बरोज़गार नौजवानों के गम में, गरीबों पर पड़ती GST की मार के गम में और सबसे बढ़कर ED के हाथ धोकर पीछे पड़ जाने के गम में. हो सकता है आज के काले विरोध प्रदर्शन की असली वजह ED ही हो, फिर भी मंहगाई और बेरोज़गारी जैसे ज्वलंत मुद्दों का उठाना, भले ही किसी बहाने हो , कांग्रेस पार्टी ही उठा रही है. देश के बाकी राजनीतिक दलों को तो जैसे सांप सूंघ गया है. शायद इसीलिए राहुल गाँधी ने आज कहा कि मंहगाई और बेरोज़गारी के मुद्दों को कोई नहीं उठा रहा है. 

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बहरहाल आप कांग्रेस के आज के प्रदर्शन को भले ही कोई नाम दें, विरोध प्रदर्शन की मंशा पर भले ही कोई भी सवाल उठाये, उसे ED की कार्रवाई पर पलटवार बताएं, पर संसद से सड़क तक कांग्रेस के काले विरोध ने सरकार के चेहरे के लाल चेहरे को सफ़ेद ज़रूर किया होगा. कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने वाली भाजपा को भी एहसास हुआ होगा कि हालात भले ही कांग्रेस के मुखालिफ हैं लेकिन उसका लड़ाई का जज़्बा अभी भी कायम है. राहुल और प्रियंका, भाई-बहन की यह जोड़ी भाजपा और उसकी सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द बनी हुई है और यह वह सिरदर्द है जो हर दवा के साथ ही और बढ़ रहा है. राहुल गाँधी तो पहले ही पीछे पड़े थे, प्रियंका ने भी आज दिखाया कि वह भी कुछ कम नहीं।

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