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बनारस में रहें प्रधानमंत्रीं, अंतिम समय में वहीं रहा जाता है


बनारस में रहें प्रधानमंत्रीं, अंतिम समय में वहीं रहा जाता है

इटावा। प्रधानमंत्री चाहे तीन महीने तक बनारस में रहें, जगह अच्छी है, आखिरी समय में वहीं रहा जाता है। यह बयान दिया है सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिसको लेकर भाजपा उनपर हमलावर हैं भाजपा का कहना है कि देश के प्रधानमंत्री के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग अखिलेश यादव की हताशा और बौखलाहट दर्शा रही है।

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही नेताओं के बयानों की भाषा भी तीखी होती जा रही है। ऐसा ही कुछ आज सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान में भी दिखाई दिया। सोमवार को इटावा के सैफई में अखिलेश यादव ने आखिरी समय में प्रधानमंत्री के बनारस में रहने की जो बात बात कही है उसको राजनीति के अंत के साथ मोक्ष प्राप्ति के अंतिम समय से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि अखिलेश ने इस बयान को लेकर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने अखिलेश यादव के इस बयान को बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि अयोध्या, काशी और मथुरा से इनका (सपा) का दुराग्रह पूरे देश की जनता ने देखा है। देश के प्रधानमंत्री के लिए ऐसी भाषा का प्रयोग काशी के साथ पूरे भारत वासियों के लिए अपमान की बात है।

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वहीं सैफई में अखिलेश यादव भाजपा पर आक्रमक रहे और उन्होंने उत्तर प्रदेश और पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा द्वारा तीनों कृषि कानून वापस देने की बात कही। सपा अध्यक्ष ने प्रदेश में उनकी सरकार बनने पर आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवार को 25 लाख रुपए देने का ऐलान किया। सपा अध्यक्ष ने कहा कि यदि भाजपा को किसानों से हमदर्दी होती तो आंदोलन इतना लंबा नहीं चलता और ना ही 700 किसानों की मौत होती। अखिलेश ने उत्तर प्रदेश में सरकार पर इटावा के विकास कार्यों में भेदभाव बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने इटावा में जेल, स्पोर्ट्स स्टेडियम के साथ विकास कार्य के अधूरे छोड़ने की बात कह योगी सरकार पर निशाना साधा।

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