१४ सितम्बर, विश्व हिंदी दिवस की आप सभी पाठकों को हार्दिक शुभकामनाएं।
अनुश्री पैन्यूली
इस बात से तो हम सब ही अवगत हैं कि हिंदी, हमारी राष्ट्रभाषा, विश्व कि सबसे प्राचीन और विकसित भाषाओँ में से एक है। यह उस बड़ के पेड़ समान है जिसका तना, जड़ें, लतायें और टहनियाँ सभी अपने में इतना कुछ समेटे हुए हैं। परन्तु, घोर विडम्बना यह है कि आज अपने ही देश में इस भाषा का मान कहीं खो गया है।
अंग्रेज़ों को हमारे देश से गए सालों हो गए परन्तु वह जो हीनता का घाव हमारे अंदर दाग गए वह इतने सालों बाद भी नहीं गया। एक अनोखी सी मानसिकता का शिकार हो गया है हमारा समाज, जिसमें अंग्रेजी और अंग्रेजी बोलने वाले को स्वयं ही हिंदी बोलने वाले से अधिक महत्व और आदर मिल जाता है । बात यह नहीं है कि हम अंग्रेजी, जर्मन या फ्रेंच क्यूँ बोलें; सभी भाषायें और बोलियाँ आदरणीय है और सबका अपना सौंदर्य है। परन्तु जब हमें अपनी ही माँ, मातृभूमि और मातृभाषा पर शर्म आने लगे तब हमें मान लेना चाहिए कि हमारी सोच पतन की ओर अग्रसर है ।
यह दुःख की बात है कि आज हमारे देश में हिंदी बोलने वाले व्यक्ति को, चाहे वह कितना ही बुद्धिमान और सभ्य क्यों न हो उसे अंग्रेजी बोलने वाले से कम आँका जाता है, फिर भले ही वह हिंदी में किसी रेस्तरां में अपने खाने का चयन ही क्यों न बता रहा हो।
वहीँ जब हम विश्व के अन्य देशों को देखते हैं तो पाते हैं कि अन्य सभी देश अपनी राष्ट्रभाषा का सम्मान करते हैं। वहॉँ के लोग भी अंग्रेजी सहित अन्य भाषाओँ का ज्ञान रखते हैं और उनका उचित जगह पर प्रयोग भी करते हैं। परन्तु फिर भी बड़े से बड़े व छोटे से छोटे दफ्तरों व अन्य सभी कार्यक्षेत्रों में प्रमुखतः राष्ट्रभाषा का ही प्रयोग होता है।
हद तो यह हैं कि ‘मुझे हिंदी नहीं आती’, जैसी निंदनीय बात बोलने में आज की नयी पीढ़ी शान महसूस करती है। इसी के चलते कईं लोग जो अपने घर में अच्छे से हिंदी में बात करते हैं बाहर लोगों से मिलते ही बनावटी तरीके से हिंदी बोलते हुए भाषा में अपनी तंगी जताने लगते हैं। यह बात जितनी हास्यपद हैं उतनी ही मूर्खतापूर्ण भी, पर फिर भी यह बात है और हम सब कभी न कभी ऐसे लोगों से मिले हैं। इस विषय पर लिखने को तो बहुत है पर बस इतना ही कहना पर्याप्त होगा कि अगर शेर मछली जैसे तैरना चाहे तो चाहे कितना भी बढ़िया क्यों न तैरने लगे सदैव अपने को कम ही पायेगा और जीवन भर हीनता का ही अनुभव करेगा। तो इस हिंदी दिवस चलिए अपनी राष्ट्र भाषा का गौरव जानें और विचार करें इसके सम्मान को विश्व स्तर तक पहुँचाने का।

