अमित बिश्नोई
प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की कांग्रेस में भावी भूमिका को लेकर असमंजस जारी है लेकिन यह तो लगभग तय हो गया कि चुनावी रणनीति बनाने वाला यह पुरोधा देश की सबसे पुरानी पार्टी का हिस्सा बनना जा रहा है हालाँकि आज भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की प्रशांत किशोर पर राय बंटी हुई नज़र आयी मगर उसमें भी रज़ामंदी की झलक देखी गयी। इन वरिष्ठ नेताओं का प्रशांत किशोर पर इस अनमनेपन के कारण ही PK को लेकर सबकुछ तय हो जाने के बावजूद अभी औपचारिक रूप से घोषणा नहीं की गयी है ।
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अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस पार्टी में प्रशांत किशोर को लेकर पता नहीं यह वरिष्ठ नेता सशंकित क्यों हैं. पिछले कई दिनों से प्रशांत किशोर दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अपने मंसूबों को लेकर मीटिंगे कर रहे हैं जिनमें राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी शामिल हैं। गेहलोत ने प्रशांत किशोर से मुलाकात के बाद मीडिया में जो बयान दिया उससे तो ऐसा लगता है कि उनकी मर्ज़ी नहीं है, उन्होंने एक तरह से मजबूरी जताते हुए कहा कि प्रशांत किशोर के जैसे बहुत से लोग हैं जो उनसे अच्छा काम कर सकते हैं लेकिन PK चूंकि बड़ा ब्रांड बन गए हैं, मोदी जी, नितीश कुमार, अमरिंदर, जगन रेड्डी और ममता बनर्जी को जितवा चुके हैं इसलिए उनका साथ लेने में कोई हर्ज नहीं।
वहीँ मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की PK को लेकर भाषा भी कुछ ऐसी ही है, कमलनाथ का दावा है कि उनकी तैयारी पहले से ही है, PK अगर आ जायेंगे तो उनके अनुभव का फायदा मिलेगा। ऐसा लगता है जैसे उनको प्रशांत किशोर की ज़रुरत तो नहीं लेकिन अगर आला कमान उन्हें भेज ही देता है तो ठीक है, यहाँ वह यह भी कहना नहीं भूले कि प्रशांत किशोर सिर्फ मध्य प्रदेश के लिए नहीं, दूसरे राज्यों के लिए भी आएंगे।
एक अजीब सी स्थिति है इन पुराने कोंग्रेसियों में, इन्हें ऐसा लगता है जैसे प्रशांत किशोर की कांग्रेस को सर्वाइव करने की योजना में उनका पत्ता साफ़ न हो जाए, हालाँकि प्रशांत किशोर ने जो प्रेजेंटेशन दिया है उसके मुताबिक एक समायोजन है जिसमें नए पुराने, दोस्त सहयोगी सभी शामिल हैं लेकिन अशोक गेहलोत के बाद फ़ौरन ही सचिन पायलट का आला कमान से मिलना इन वरिष्ठ कोंग्रेसियों की शंकाओं को बल देता है और शायद इसीलिए यह लोग प्रशांत किशोर को पार्टी में कोई महत्वपूर्ण पद दिए जाने का विरोध कर रहे हैं और PK के कांग्रेस में शामिल होने के लिए तरह तरह की शर्तों की बात कर रहे हैं।
वहीँ प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) भी इस बार कांग्रेस में आने के लिए कोई ऐसा महत्वपूर्ण पद चाहते हैं जिससे कि अपनी बात को पार्टी प्लेटफॉर्म पर मज़बूती से रख सके और उनकी बातों का मान भी रखा जाय, PK चाहते हैं कि वह सिर्फ रणनीति ही न बनायें रणनीति पर अमल भी करवाए और इसके लिए उन्हें महासचिव जैसा कोई महत्वपूर्ण पद चाहिए।
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ख़बरों की मानें तो प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की पार्टी में पोज़िशन के बारे सोनिया गाँधी ने फैसला कर लिया है, प्रशांत किशोर को भी उसकी जानकारी मिल चुकी है लेकिन जबतक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हो जाती तब तक गारंटी से कुछ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह कांग्रेस पार्टी है यहाँ कुछ भी हो सकता है, PK के मामले में पहले भी हो चूका है. फिलहाल तो देश में जो राजनीतिक हालात हैं उसको देखते हुए कांग्रेस पार्टी और प्रशांत किशोर एक दुसरे के लिए अपरिहार्य लगते हैं, इस मिलन की जितनी जल्दी घोषणा हो, देश और कांग्रेस पार्टी दोनों के लिए अच्छा होगा।
