हिंदू पंचांग के मुताबिक, प्रत्येक माह की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए होता है। इस बार 23 सितम्बर, शुक्रवार को प्रदोष का व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। प्रदोष व्रत व पूजा कैसे करें और प्रदोष वाले दिन इन उपायों को करने से भाग्योदय हो सकता है। प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराना चाहिए। इसके बाद बेल पत्र, सुगंध फूल,चावल, धूप, दीप, नैवेद्य, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान शिव को चढ़ाएं। संभव हो तो पूरे दिन निराहार कर सकते हैं। शाम को भी इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें।
भगवान शिवजी को घी शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। इसके बाद आठों दिशाओं में आठ दीपक जलाएं। भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसी प्रसाद से अपना व्रत भी तोड़ें। प्रदोष के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें । सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अध्र्य देें। पानी में आकड़े के फूल मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को प्रिय हैं। ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा बनी रहती है और भाग्योदय हो सकता है।
