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पहले चरण की चर्चित सीटें

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स्पेशल स्टोरी
कई हफ्तों के हाई-वोल्टेज चुनाव प्रचार, भव्य रोड शो और मैराथन चुनावी यात्राओं के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल को होने वाला है जिसमें 102 निर्वाचन क्षेत्रों में वोटिंग होगी। इन 102 सीटों में आठ केंद्रीय मंत्री, दो पूर्व मुख्यमंत्री और एक पूर्व राज्यपाल की राजनीतिक किस्मत का भाग्य लिखा जाने वाला है. 19 अप्रैल को कई हाई-प्रोफाइल मुकाबले होने की संभावना है, यहाँ हम कुछ उन सीटों का ज़िक्र करने जा रहे हैं जो भले ही VVIP न हों मगर किसी न किसी कारण से चर्चा में हैं और राजनीतिक पंडितों की निगाहें भी इनपर लगी हुई है।

कोयंबटूर (तमिलनाडु):
यहाँ तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष के अन्नामलाई का मुकाबला डीएमके नेता गणपति पी राजकुमार और एआईएडीएमके के सिंगाई रामचंद्रन से है. अन्नामलाई भाजपा के स्टार उम्मीदवार और पूरे क्षेत्र में पार्टी की विस्तार योजनाओं में एक केंद्रीय व्यक्ति के रूप में उभरे हैं। बीजेपी को कोयंबटूर में बड़ी संभावनाएं दिख रही है. हालाँकि तमिलनाडु में इंडिया गठबंधन का दबदबा है, प्रायोजित सर्वे भी यही बता रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री ने दक्षिण में अपने चुनाव प्रचार का जो फोकस तमिलनाडु और खासकर कोयम्बटूर पर किया उससे ये यही लगता है कि भाजपा ने इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है.

पीलीभीत (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश में पहले चरण की आठ सीटों में एक पीलीभीत की भी है, भाजपा ने यहाँ से योगी सरकार के मंत्री जितिन प्रसाद को मैदान में उतारा है. दरअसल पीलीभीत चर्चा का केंद्र इसलिए है कि यहाँ से गाँधी परिवार के सदस्य वरुण गाँधी भाजपा का नेतृत्व करते थे लेकिन भाजपा ने इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया। पीलीभीत में उम्मीदवारी को लेकर भाजपा के अंदर काफी समय तक असमंजस रहा. जब तक भाजपा ने जितिन प्रसाद का नाम नहीं घोषित किया तब तक वरुण गाँधी को टिकट मिलेगा या नहीं इसी बात की चर्चा होती रही, बल्कि टिकट फ़ाइनल होने के बाद भी वरुण गाँधी आगे क्या करने वाले हैं, इसी बात पर बहस होती रही, यही वजह है कि पीलीभीत पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं. सपा ने यहाँ से भगवत सरन गंगवार और बसपा ने अनीस अहमद खान को मैदान में उतारा है.

कूच बिहार (पश्चिम बंगाल):
यहां मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा उम्मीदवार निशीथ प्रमाणिक और तृणमूल के जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया के बीच है। पिछले लोकसभा चुनाव में प्रमाणिक ने 50,000 से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दोनों ने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा किया, इस बात से आप इस सीट का महत्त्व समझ सकते हैं।

छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश):
इस सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ की विरासत दांव पर है क्योंकि उनके बेटे नकुल नाथ परिवार के गढ़ से एक और कार्यकाल की उम्मीद कर रहे हैं। बता दें कि 2019 की मोदी आंधी में मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा ही एकमात्र सीट थी जहाँ कांग्रेस पार्टी को जीत हासिल हुई थी. भाजपा ने यहाँ से विवेक ‘बंटी’ साहू को मैदान में उतारा है. साहू पहले विधानसभा चुनाव में कमल नाथ से हार गए थे। दरअसल छिंदवाड़ा से नकुलनाथ की उम्मीदवारी चर्चा का केंद्र इसलिए रही क्योंकि कई बार ये बात भी सामने आयी कि नकुलनाथ अपने पिता के साथ भाजपा में शामिल हों जा रहे हैं.

नागपुर (महाराष्ट्र):
यहाँ से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कांग्रेस के विकास ठाकरे से मुकाबला होगा। पिछले चुनाव में गडकरी ने कांग्रेस उम्मीदवार नाना पटोले को 2,16,000 वोटों के अंतर से हराकर सीट बरकरार रखी। तीसरे कार्यकाल के लिए प्रयासरत नितिन गडकरी ने दावा किया है कि वह इस साल 5 लाख वोटों से चुनाव जीतेंगे। गडकरी मोदी कैबिनेट के एकमात्र मंत्री हैं जो मोदी के काम से नहीं बल्कि अपने काम से पहचाने जाते हैं , देश में सड़कों का जाल बिछाने और एक्सप्रेसवे कल्चर लाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

रामपुर (उत्तर प्रदेश):
रामपुर का नाम आते ही सभी के ज़हन में आज़म खान का नाम आता है जो आजकल अपने परिवार के साथ जेल में हैं. रामपुर एक ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है जिसे सपा का गढ़ माना जाता है लेकिन अब हालात काफी बदल गए हैं. इसबार के चुनाव में आज़म खान के परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव में नहीं है यही वजह है कि काफी मशक्कतों के बाद अखिलेश यादव ने यहाँ से दिल्ली के संसद मार्ग स्थित एक मस्जिद के मौलवी मोहिबुल्लाह नदवी को अपना उम्मीदवार घोषित किया। इस सीट पर लोगों की निगाहें इस लिए भी लगी हैं कि लोग जानना चाहते हैं कि आज़म खान के समर्थक मौलवी साहब का कितना समर्थन करते हैं.

मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश):
अपनी जटिल जातीय गतिशीलता के लिए मशहूर, पश्चिम यूपी निर्वाचन क्षेत्र में त्रिकोणीय चुनावी लड़ाई देखी जा रही है। केंद्रीय मंत्री संजीव बलियान का मुकाबला समाजवादी पार्टी के हरेंद्र मलिक और बसपा प्रत्याशी दारा सिंह प्रजापति से है। यहाँ मामला इसबार संजीव बालियान के लिए काफी टाइट बताया जा रहा है, भाजपा की अंदरूनी कलह यहाँ पर पूरी तरह उभर आयी है, राजपूतों की भाजपा से नाराज़गी एक बहुत बड़ा मुद्दा बन चुकी है, संगीत सोम और संजीव बालियान का भाजपा नेतृत्व ने हाथ भले ही मिलवा दिया हो लेकिन दिल मिलवा पाए हैं इसमें बहुत संदेह है, ऐसे में संजीव बालियान यहाँ से अपनी हैटट्रिक पूरी कर पाएंगे, इसी बात पर सबकी निगाहें हैं.

अलवर (राजस्थान):
अलवर में झड़प, जिसे व्यापक रूप से भारत की गौरक्षा का ग्राउंड जीरो माना जाता है, शायद राजस्थान में सबसे दिलचस्प चुनावी मुकाबला है। इस ‘यादव बनाम यादव’ लड़ाई में, भाजपा के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव का मुकाबला कांग्रेस के युवा मौजूदा विधायक ललित यादव से है। यहां पर भूपेन्द्र यादव का दांव ऊंचा है जो पीएम मोदी के करीबी होने के लिए जाने जाते हैं फिर यादव बनाम यादव पर लोगों की निगाहें हैं.

गया (बिहार):
गठबंधन के टकराव में हम नेता जीतन राम मांझी का मुकाबला राजद के कुमार सर्वजीत से है। जहां मांझी भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा हैं, वहीं सर्वजीत राजद-कांग्रेस गठबंधन का प्रतिनिधित्व करेंगे। बिहार के पूर्व सीएम मांझी ने पिछले तीन मौकों पर गया से चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे देखना होगा कि क्या हार का सिलसिला टूटेगा या फिर वो मात्र गठबंधन का एक हिस्सा भर ही रह जायेंगे।

जम्मू-कश्मीर (उधमपुर):
पहले चरण में चुनाव होने वाली एकमात्र जम्मू-कश्मीर सीट, यहां के चुनाव पर विशेष रूप से नजर रखी जाएगी क्योंकि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद यह पहली ऐसी बड़ी कवायद होगी और विधानसभा चुनावों के लिए माहौल तैयार करेगी। यहाँ पर केंद्रीय मंत्री और मौजूदा सांसद जितेंद्र सिंह का मुकाबला कांग्रेस के दो बार के लोकसभा सांसद चौधरी लाल सिंह से होगा। गुलाम नबी आजाद की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी ने इस सीट से जीएम सरूरी को मैदान में उतारा है।

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