महाराष्ट्र की सियासत में शह और मात का खेल जारी है, इस बीच जानकारी मिली है कि बगावत के बाद शिवसेना प्रमुख लगभग टूट चुके थे और इस बीच उन्होंने दो बार सत्ता छोड़ने का मन बना लिया था मगर यह एनसीपी प्रमुख और भारतीय राजनीति के चाणक्य शरद पवार ही थे जिन्होंने उद्धव ठाकरे को ऐसा करने से रोका और सिर्फ रोका ही नहीं बल्कि सक्रिय और सख्त होने पर भी तैयार किया। नर्म स्वभाव वाले उद्धव ठाकरे का नया रूप उसके बाद ही नज़र आया है जिसने बागियों को सबक दिखाने और शिवसैनिकों पर अपनी पकड़ बनाने की शुरुआत की.
यह शरद पवार और उद्धव ठाकरे की दो दिनों में दो महत्वपूर्ण बैठकों के बाद हुआ है जो ठाकरे आज एक्शन में दिख रहे हैं. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बागी मंत्रियों के विभाग दूसरे विधायकों को सौंपकर बगावत को कुचलने की शुरुआत कर दी है. हालाँकि आज बागी गुट को अयोग्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी राहत मिली है लेकिन उद्धव ठाकरे खेमा भी कानूनी लड़ाई के लिए कील कांटे से पूरी तरह दुरुस्त नज़र आ रहा है. सरकार के साथ ही उद्धव ने पार्टी को बचाने की भी मुहीम छेड़ दी है. नाराज़ शिवसैनिक इस वक़्त बागियों के खिलाफ सड़कों पर है.
वहीँ सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले पर आदित्य ठाकरे ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि धोखेबाज़ों की कभी जीत नहीं होती है. इसी के साथ ही संजय राउत को आज ED के नोटिस के बाद यह साफ़ हो गया है कि भाजपा इसमें अब खुलकर सामने आना चाहती है. नए बदले परिदृश्य में उसकी रणनीति भी बदल रही है. अब उसका ध्यान सरकार गिराने और सरकार बनाने पर नज़र आ रहा है, खबर है कि आज रात पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के घर पर भाजपा विधायकों का जमावड़ा होने वाला है. वहीं यह भी सुनने में आ रहा है कि बागी शिंदे गुट जल्द ही उद्धव सरकार के खिलाफ राज्यपाल से संपर्क करके अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है.
महाराष्ट्र में चल रही सियासी हलचल के बीच सूत्रों का कहना है कि यहां पर राज्यपाल किसी भी समय फ्लोर टेस्ट की बात कह सकते हैं. वहीं बताया जा रहा है कि उद्धव दो बार इस्तीफा देना चाहते थे, लेकिन शरद पवार ने उन्हें रोक लिया. बताया जा रहा है हाल ही में जब उद्धव ने सोशल मीडिया पर आकर संबोधन दिया वो उसी समय इस्तीफा देना चाहते थे.
वहीं शिंदे गुट के विधायक दीपक केसरकर ने कहा कि हम शिवसेना और बीजेपी की सरकार चाहते हैं. प्रदेश में बेहतर सरकार बनेगी तो बेहतर काम होगा. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार अल्पमत में है. उद्धव ठाकरे सरकार को हार मान लेनी चाहिए और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए.
11 जुलाई के बाद शुरू होगी अयोग्यता की प्रक्रिया
बता दें कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों की अयोग्यता के डिप्टी स्पीकर के फैसले को 11 जुलाई तक रोक दिया है. आदेश पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि हमारे लिए सुप्रीम कोर्ट भगवान है, लेकिन महाराष्ट्र में जनता की भावनाएं अलग हैं. 11 जुलाई के बाद बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने की प्रक्रिया शुरू होगी. 40 विधायकों की बॉडी मुंबई आने वाले बयान पर घिरे राउत ने कहा कि मुझे गिरफ्तार करो, मैं यहां शिवसेना भवन में बैठा हूं. अगर मुझे शिवसैनिकों के लिए बलिदान देना होना है, तो हो जाऊंगा. इसमें कौन सी बड़ी बात है.
शिंदे गुट के लोग बागी नहीं भगोड़े हैं- आदित्य
आदित्य ठाकरे ने गुवाहाटी में बैठे बागी विधायकों पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि वे सामने आएं और आंख में आंख डालकर हमसे बात करें. यह राजनीति नहीं, सर्कस बन गया है. यह बागी नहीं भगोड़े हैं. जो भागकर जाते हैं, वे कभी जीतते नहीं हैं. वहीं उन्होंने कहा कि कुछ विधायक हमारे साथ हैं. जो वापस आना चाहते हैं, उनका स्वागत है.
विधायकों को तुरंत सिक्योरिटी मुहैया कराए सरकार: SC
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखे और शिंदे गुट के सभी विधायकों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए. उनकी संपत्ति को कोई नुकसान न पहुंचे. सरकार सभी विधायकों और उनके परिवार को तुरंत उचित सुरक्षा मुहैया कराए.
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शिंदे कैंप का सुप्रीम कोर्ट में दावा – 39 MLA हमारे साथ
सुप्रीम कोर्ट में शिंदे कैंप ने दावा किया कि उनके साथ 39 विधायक हैं. ऐसे में महाराष्ट्र सरकार अल्पमत में है. बागी गुट ने यह कहा कि डिप्टी स्पीकर की छवि जब संदेह के घेरे में है तो फिर वह अयोग्य ठहराने का प्रस्ताव कैसे ला सकते हैं.शिंदे गुट ने कहा कि पहले उन याचिकाओं पर सुनवाई होनी चाहिए जिनमें डिप्टी स्पीकर को हटाने की मांग की गई है. बागी विधायकों ने कहा कि डिप्टी स्पीकर सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई कुछ देर के लिए रोक दी गई. अब यह सुनवाई दोबारा शुरू हो चुकी है.

