Operation Lotus BJP: बिहार में तथाकथित ऑपरेशन लोटस को अंजाम तक पहुंचने से पहले ही हिल गई भाजपा की जमीन

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पटना। बिहार में तथाकथित आपरेशन लोटस को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश करने वाले नीतीश कुमार के दो सूरमाओं को अब वो क्या दंड़ देते हैं उनके साथ क्या सलूक करते हैं। यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन बिहार का तथाकथित आपरेशन लोटस जब मुरझा गया तो इससे भाजपा की राज्य में जमीन भी हिली है। इसके दूरगामी परिणाम भाजपा के लिए काफी घातक सिद्ध होंगे। ऐसा राजनीति के जानकारों का मानना है। बिहार में ऑपरेशन लोट्स चलाने की पूरी तैयारी थी। जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष आरसीपी सिंह की भी आपरेशन लोटस में सहभागिता की बात कही जा रही है। सूत्रों की माने तो ऑपरेशन लोटस में आरसीपी सिंह के अतिरिक्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी लोग भी शामिल थे। फिलहाल यही बताया जा रहा है कि जेडीयू की तरफ से ऑपरेशन लोटस को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश करने वाले राज्य की राजनीति में नीतीश के साथ के दोनों लोग हैं। दोनों में एक पहले दूसरी पार्टी में रह चुके हैं। कहा जाता है कि उस नेता का जेडीयू में आने के बाद से कद काफी तेजी से बढ़ा है।

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दूसरा नेता भी सीएम नीतीश का ही करीबी हैं। सूत्रों की माने तो दोनों नेता नीतीश के लव कुश हैं और दोनों महादलित फैक्टर के अहम चेहरा माने जाते हैं। एक नेता आमतौर पर जेडीयू या नीतीश कुमार से जुड़े मसले पर बोलने के लिए तो हमेशा आगे रहे हैं। लेकिन मंगलवार को गहमागहमी में वह पूरी तरह से गायब ही दिखे। दो दिन पहले उस नेता ने आखिरी बार पटना से करीब ढाई सौ किमी दूर स्थित शहर के एक कार्यक्रम में देखा था। जेडीयू सूत्र की माने तो जब से उन्हें इस अहसास हुआ है कि नीतीश कुमार को उनकी करतूत के बारे में पता चला है तब से वह मीडिया की हलचल से दूर हो गए। वहीं दूसरे नेता मंगलवार को जेडीयू के विधायकों की बैठक में शामिल तो हुए। लेकिन बिना कुछ बात किए ही अपनी कार में बैठकर चले गए। वह सीधे मीटिंग में शामिल होने के लिए ही आए थे।  देखना दिलचस्प होगा कि जेडीयू की ओर से कब कथित ऑपरेशन लोटस को लेकर पुख्ता सबूत लाए जाते हैं। इसी के साथ यह भी देखना होगा कि जेडीयू अपने उन दोनों नेताओं के नाम पूरी तौर से सार्वजनिक करती है या नहीं। जो कथित रूप से इस ऑपरेशन लोटस में साझेदार बने हुए थे। सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार के नए मंत्रिमंडल के चेहरों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकेगा कि इन दो चेहरों पर सीएम नीतीश ऐक्शन लेते हैं या फिर इन दोनों ाके छोड़ देते हैं।  क्योंकि दोनों चेहरे पिछली सरकार में अहम मंत्रालय संभालते रहे हैं।

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