Political Crisis in Bihar: नीतिश और राजद की नजदीकी कर सकती है बड़ा उलटफेर, नए समीकरण से भाजपा को झटका

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पटना। बिहार की राजनीति के सियासी दिग्गज एक बार फिर से प्रदेश के लिए नई इबारत लिखने का काम कर रहे हैं। जानकारी है कि प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर होने के आसार है। मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और राजद मिलकर कुछ गुल खिला सकते हैं। वहीं कांग्रेस भी इनके साथ ताल मिला रही है। जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह के त्यागपत्र के बाद से मुख्यमंत्री नीतिश कुमार भाजपा पर हमलावर हो गए है। आने वाले दिनों में बिहार का सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा यह भविष्य ही जानें। लेकिन राजनीति गलियारों में चर्चा है कि एक से दो दिन में भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ने का एेलान मुख्यमंत्री नीतिश कुमार कर सकते हैं। 

भाजपा और जदयू के बीच दूरी बढ़ने के पीछे कई वजह हैं। एक तो पहला जाति आधारित जनगणना के मामले में नीतीश कुमार भाजपा से अलग-थलग नजर आए हैं। उन्होंने विपक्षी दलों के साथ जाति आधारित जनगणना की मांग की थी। वहीं सरकार चलाने में उनको किसी प्रकार का फ्री हैंड नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा चिराग प्रकरण और आरसीपी प्रकरण से मुख्यमंत्री नीतिश की भाजपा से बढी हैं। भ्रष्टाचार के मामले में जदयू ने आरसीपी सिंह को नोटिस दिया था। इसके बाद उन्होंने जदयू से ही इस्तीफा दे दिया। जदयू का आरोप है कि आरसीपी सिंह के बहाने भाजपा, जदयू में बगावत करवाना चाहती है। इसी के चलते दोनों पार्टियों के बीच दूरी बढ़ रही है। 

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बता दें कि बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटे हैं। बहुमत साबित करने के लिए 122 सीटों की जरूरत है। आंकड़ों को देखें तो बिहार में इस समय सबसे बड़ी पार्टी राजद है। राजद के पास इस समय विधानसभा में 79 सदस्य हैं। जबकि भाजपा के पास 77, जदयू के पास 45 सदस्य, कांग्रेस के पास 19 विधायक, कम्यूनिस्ट पार्टी के पास 12 सदस्य, एआईएमआईएम के पास 01, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के पास  चार विधायक हैं। इसके अलावा अन्य विधायक हैं। वर्तमान में जदयू के पास अपने 45 विधायक हैं। ऐसे में अगर भाजपा से वो अलग होते हैं तो सरकार बनाने के लिए नीतिश को 77 विधायकों की जरूरत है। राजद और जदयू के बीच नजदीकी बढ़ी हैं। ऐसे में अगर दोनों साथ आते हैं तो राजद के 79 विधायक मिलाकर 124 सदस्य हो जाएंगे।  जो राज्य  में सरकार बनाने के बहुमत से अधिक हैं। इसके अलावा जानकारी है कि गठबंधन में कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी शामिल हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो कांग्रेस के 19 और कम्यूनिस्ट पार्टी के 12 विधायकों को मिलाकर गठबंधन के पास बहुमत से कहीं अधिक 155 विधायक हो जाएंगे। ऐसे में नीतिश और राजद बिहार में भाजपा का राजनैतिक अस्तित्व खतरे में लाने का काम कर सकते हैं।

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