पटना। बिहार में राजनीतिक हलचल आज और तेज हो गई है। इस बीच जानकारी मिली है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बीच फोन पर बात है। इस समय भाजपा और जदयू के रिश्ते टूटने के कगार पर हैं। दोनों दलों के बनते बिगड़ते रिश्तों की अटकलों के बीच गृहमंत्री शाह का नीतीश को फोन करना कई मायनों में अहम माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार दावा किया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच करीब 10 मिनट बात हुई है। इसके बाद से अटकलें भी लगने लगी हैं कि बिहार में भाजपा और जदयू का गठबंधन बना रहेगा।
इससे पहले कई नेता बिहार के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद के आवास पर आज सुबह पहुंचे। सोमवार को पूरे दिन भाजपा-जदयू के बीच तनातनी की खबरें आती रहीं। राजद व अन्य विपक्षी दलों ने तो यहां तक घोषणा कर दी थी कि अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा का साथ छोड़े तो हम उन्हें समर्थन देने को तैयार हैं। इस बीच पटना में आज मंगलवार की सुबह बैठक भी शुरू हो चुकी है। मंगलवार की सुबह आज सभी दल अपनी अलग बैठक कर रहे हैं। यदि नीतीश कुमार राजद के साथ सरकार बनाने का फैसला करते हैं तो यह भाजपा की उन कोशिशों को बड़ा झटका होगा। जिसमें पार्टी 2024 के आम चुनावों को लेकर बेहद गंभीरता के साथ तैयारी में जुटी थी। बिहार से 40 लोकसभा सीटें हैं। राज्य के मतदाताओं में जातीय आधारों पर बड़ा बिखराव है। इस बिखराव को भाजपा अकेले अपने दम पर रोकने में कामयाब नहीं हो सकती इसके लिए उसके सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा होगा। वहीं अगर जदयू और राजद के अलावा अन्य दल राज्य में साथ आते हैं तो एनडीए को तगड़ा झटका लगेगा। जिसका सीधा नुकसान भाजपा को ही होना है।
भाकपा.माले का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भाजपा से नाता तोड़ने के बाद उठाए हर कदम का उनकी पार्टी स्वागत करेगी। एक दर्जन विधायक वाली पार्टी के विधायक दल के नेता महबूब आलम ने कहा कि अगर नीतीश भाजपा से नाता तोड़ते हैं तो हमसब उनका साथ देंगे। वहीं जदयू प्रवक्ता केसी त्यागी का कहना है कि नीतीश कुमार हमारे नेता हैं। उनका सम्मान सभी करते हैं। इसलिए पार्टी में किसी तरह की फूट का सवाल नहीं है। नीतीश के नेतृत्व में पार्टी जो फैसला लेगी वह सब को स्वीकार्य होगा।

