Politics News Today: मंत्री दिनेश खटीक के दलित बम ने खोले भाजपा नेतृत्व के कान,मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा निशाना

 
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उप्र सरकार के जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक के दलित बम से भाजपा नेतृत्व के कान खुल गए है। हस्तिनापुर विधायक ने राज्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर दलित होने की दुहाई दी और आलाधिकारियों द्वारा दलितों के उत्पीड़न की बात उठाई है। उससे इसका असर भाजपा दलित राजनीति पड़ सकता है। राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने अपने दिए इस्तीफे में दलित शब्द पर अधिक जोर दिया है। इसी के साथ हस्तिनापुर विधायक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी सीधा निशाना साधा है। भाजपा के द​लित मंत्री दिनेश खटीक ने अपना इस्तीफा सीधा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को भेजा। केंद्रीय गृहमंत्री अमितशाह को इस्तीफा भेजने वाले दलित विधायक और राज्यमंत्री ने अपने विभाग की कार्यशैली और अधिकारियों की दलितों के प्रति बेरूखी का आरोपी लगाया है। विधायक दिनेश खटीक के इस्तीफे के पीछे इसका बहुत बड़ा कारण बताया जा रहा है।  राज्यमंत्री दिनेश खटीक का दर्द है कि उनके दलित होने के कारण ही विभाग में उनकी नहीं सुनी जा रही है। दलित होने के कारण विभागीय बैठक में भी नहीं बुलाया जाता है। जलशक्ति मंत्री दिनेश खटीक के इस्तीफे के बाद से योगी कैबिनेट में अन्य असंतुष्ट मंत्रियों में हौंसला जागा है। सूत्रों की माने तो वर्तमान में योगी सरकार में एक दर्जन राज्यमंत्री ऐसे हैं जो कि प्रदेश की भाजपा सरकार में अपनी उपेक्षा से काफी व्यथित हैं। जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक के इस्तीफे के पीछे बड़ा कारण है। राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने अपने खुले पत्र में लिख दिया है कि वो दलित जाति से हैं। इसलिए ही उनके विभाग ने उनके साथ भेदभाव किया जाता है। राज्यमंत्री ने अपने पत्र में पूरा दर्द बया किया। 

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दिनेश खटीक ने अपने इस्तीफा पत्र में दलित शब्द का उपयोग कर भाजपा को घेरने की कोशिश की है।  वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव हैं। ऐसे में भाजपा किसी भी कीमत पर दलितों को नाराज करने का जोखिम मोल नहीं लेना चाहती। राज्यमंत्री दिनेश खटीक यह बाखूबी जानते हैं। यहीं कारण है कि विधायक दिनेश खटीक ने अपनी बात रखने के लिए अपने इस्तीफे में दलित होने पर ज्यादा जोर दिया। दलित बम फोड़कर भाजपा विधायक दिनेश खटीक ने भाजपा नेतृत्व के कान खोलने की कोशिश की है। वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में बसपा का कोर वोट बैंक दलित पहली बार भाजपा को शिफ्ट हुआ था। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा का वोट शेयर 22.9 फीसद था। जो कि 2022 के चुनाव में मात्र 12.8 फीसद रहा। जो कि पिछले चुनाव से 10 प्रतिशत कम था। इसी के साथ बसपा का कोर वोट बैंक दलित बड़ी संख्या में भाजपा की की तरफ डायवर्ट हुआ। भाजपा दलितों के इस वोट बैंक को किसी कीमत पर गंवाना नहीं चाहेगी। इसी के चलते राज्यमंत्री दिनेश खटीक को दिल्ली बुलाया गया और डैमेज कंट्रोल किया। राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने इस्तीफे में अधिकांश जगह दलित शब्द का उपयोग कर भाजपा नेतृत्व के साथ ही मुख्यमंत्री योगी सरकार को घेरने की कोशिश की है। हालांकि  भाजपा शीर्ष नेतृत्व सब कुछ मैनेज की बात कर रहा है।