अहमदाबाद। गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्तादल भाजपा और कांग्रेस के बीच आदिवासी वोट बैंक लेकर खींचतान जारी है। कांग्रेस ने जहां आदिवासी विधायकों को अपने खेमे में लाकर आदिवासी सम्मेलन का दांव चला। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने आदिवासी वोटबैंक को अपनी तरफ करने के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सरकार में आदिवासी समुदाय के चार नेताओं को मंत्री बनाया। इसी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आदिवासियों को भाजपा के पक्ष में साधने के लिए प्रदेश में आदिवासी सम्मेलन कर चुके हैं। गुजरात में भारतीय ट्राइबल पार्टी यानी बीटीपी संस्थापक और भरुच की विधानसभा सीट झगाड़िया सीट से छह बार विधायक रहे छोटू वसावा को आदिवासियों का और गरीबों का मसीहा कहा जाता है। राज्य के 15 प्रतिशत आदिवासी वोट बैंक पर इनकी बेहतर पकड़ मानी है। इसी को देखते हुए आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने बीटीपी के साथ गठबंधन कर लिया है।
आदिवासियों के मसीहा कहे जाने वाले छोटू वसावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की चुनाव में कितनी मदद कर सकेंगे ये तो चुनाव परिणाम ही बताएगा। लेकिन छोटू वसावा आप से गठबंधन के बाद फिर से चर्चा में आ गए हैं। छोटू वसावा का भरूच व नर्मदा इलाके में बहुत अच्छा प्रभाव माना जाता है। यहां के लोग छोटू वसावा को भगवान के रूप में पूजते हैं। आदिवासी नेता माने जाने वाले छोटू वसावा पहले जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ते थे। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले छोटू वसावा जनता दल से अलग हुए और भारतीय ट्राइबल पार्टी बना ली। 2017 के विधानसभा चुनाव में उनकी इस पार्टी के दो प्रत्याशी चुनाव जीते। जिसमें एक खुद छोटू वसावा भरुच की झगाड़िया सीट से जीते। वे इस सीट से लगातार 6 बार से चुनाव जीतकर विधायक बन रहे हैं। पहली बार उन्होंने विधानसभा चुनाव 1990 में लड़ा और जीत हासिल की थी। इसके बाद वो लगातार इस सीट पर जीत हासिल करते आ रहे हैं। दूसरी सीट उनके बेटे महेश वसावा को मिली जो कि नर्मदा की डेडियापाडा सीट से विधायक बने थे। बता दें गुजरात विधानसभा चुनाव में आदिवासी समुदाय के वोटबैंक पर भाजपा से लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की नजर है। 15 प्रतिशत आदिवासी वोट गुजरात की 27 सीटों पर असर रखते हैं। जिसके चलते आम आदमी पार्टी ने इनके बीच अपना प्रभाव जमाने के लिए ही बीटीपी के साथ गठबंधन किया।

