आगामी 16 फरवरी को त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना। भाजपा ने अपनी सत्ता बचाने के लिए घोड़े खोले हुए है. मुख्यमंत्रियों से लेकर प्रधानमंत्री तक चुनावी सभाएं कर पार्टी के पक्ष में माहौल बना रहे हैं वहीँ सीपीआई एम् और कांग्रेस पार्टी एक प्लेटफॉर्म पर आकर मुख्यमंत्री माणिक साहा की नींद हराम किये हुए हैं. साहा घर घर जाकर लोगों से वोट मांग रहे हैं. वहीँ वो पिछली बार से ज़्यादा सीटें लाने की बात भी कर रहे हैं.
वोट बैंक की राजनीति करते हैं लेफ्ट और कांग्रेस
साहा मानते हैं कि सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए सीपीआई एम् और कांग्रेस एक साथ आये हैं हालाँकि पहले यह दोनों पार्टियां धुर विरोधी थी. वहीँ भाजपा के लिए उनका कहना है कि वो वोट बैंक की सियासत में यकीन नहीं रखती, यह अलग बात है कि चुनावी सभाओं में भाजपा के नेता विकास से ज़्यादा अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की बात करते हैं. साहा का दावा है कि त्रिपुरा के लोग काम पर वोट देंगे। उनका कहना है कि भाजपा के पांच सालों की तुलना सीपीआई एम् के 25 साल के शासन से लोग कर रहे हैं और उनको फर्क साफ़ नज़र आ रहा है.
जनता का विश्वास भाजपा के साथ
साहा ने दावा किया कि पिछले पांच सालों में सरकार ने राज्य और केंद्र की योजनाओं का भरपूर तरीके से क्रियान्वयन किया है. कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है। रेलवे, वायुमार्ग, राष्ट्रीय राजमार्गों और इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ी है। यही कारन है जो मैं कह रहा हूँ कि इस चुनाव में भाजपा की सुनामी आएगी। उन्होंने कहा कि पिछली बार भाजपा गठबंधन को 44 सेटें मिली थी, इस बार अकेले भाजपा को 36 से ज़्यादा सीटें मिलने जा रही हैं. लेफ्ट-कांग्रेस के गठबंधन को नकारते हुए साहा ने कहाकी राज्य की जनता का विशवास भाजपा पर है और इस विश्वास के आगे कोई भी अंकगणित काम नहीं करने वाला।

