Bjp Mission 2024: भाजपा ने 2024 में 350 सीटें जीतने का बनाया ये खास प्लान, इस रणनीति पर पार्टी करेगी काम

 
Bjp Mission 2024:

2024 के लोकसभा चुनाव लिए भाजपा ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। राज्यवार सर्वे शुरू हो चुका है। सांसदों का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो रहा है। राज्यों के प्रभारियों का एलान हो चुका है। भाजपा नेता 2024 में 350 से अधिक सीटें जीतने का दावा जता रहे हैं। दावा करने वालों में मेरठ से लेकर प्रदेश और केंद्र तक के नेता शामिल हैं।   2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अधिकतर राज्यों के प्रभारी और सह प्रभारियों की सूची जारी कर दी। लोकसभा सीटों पर सर्वे का काम चल रहा है। ये सर्वे उन सीटों पर चल रहा है जहां पर 2014 और 2019 चुनाव में भाजपा ने जीत प्राप्त की थी या फिर पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी। 

भाजपा ने इस बार 2024 के आम चुनाव में 350 पार के लिए इन पांच बिदुओं पर अपनी रणनीति तैयार की है। 

हारी हुई सीटों पर मंथन 2014 और 2019 में बीजेपी को जिन सीटों पर हार मिली थी। पार्टी उन सीटों की समीक्षा कर रही है। इसके अनुसार इन सीटों पर विपक्ष की जीत की वजह जातीय और धार्मिक फैक्टर के साथ विपक्ष उम्मीदवार चेहरा रहा था। इस बार अभी से ऐसी सभी सीटों पर भाजपा फोकस कर रही है।  दावा है कि भाजपा 2019 में हारी हुई 100 सीटों पर जीत दर्ज करने की रणनीति पर काम कर रही है। 2019 में जीती सीटों में जितनी सीटें कम होंगी उससे अधिक सीटें पार्टी हारी सीटों पर जीत दर्ज करके इस आकंड़े को हासिल करने की रणनीति बना रही है। आने वाले दिनों में भाजपा जातीय और धार्मिक समीकरण को साधने का काम तेजी से शुरू करेगी। इन सीटों पर केंद्रीय मंत्री, राज्य सरकार मंत्रियों का दौरा अधिक से अधिक होगा। स्थानीय लोगों की हर समस्या का निस्तारण करने की कोशिश के साथ ही उन्हें सरकार के कामकाज की जानकारी दी जाएगी।     

बूथ स्तर पर मजबूत बनाने का काम, देशभर में भाजपा ने बूथ स्तर पर खुद को मजबूत बनाने का काम शुरू किया है। खासतौर पर उन बूथ पर अधिक फोकस है, जहां से पिछले दो लोकसभा चुनावों में भाजपा को कम वोट मिले थे। देखा जा रहा है कि किस प्रकार और कहां से वोटों के बढ़ने की संभावना अधिक है और कहां पर कम? जहां थोड़ी सी संभावना दिख रही है, वहां भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को दोगुनी मेहनत के साथ काम करने को कहा है। बूथ स्तर पर मतदाता सूची तैयार हो रही है। फिर भाजपा के मतदाता हों या नहीं। विपक्ष को वोट देने वालों से अच्छे रिश्ते बनाने के लिए कहा है।  

पिछड़े.दलित और आदिवासी पर फोकस , बीते दिनों भाजपा पिछड़े मोर्चे की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि हर तरह से पिछड़े वर्ग लोगों को भाजपा से जोड़ने का काम और तेज होगा। अधिक से अधिक पिछड़े वर्ग के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए और लाभांवित लोगों को भाजपा से जोड़ा जाए। इसी तरह से दलित और आदिवासी मतदाता के बीच संदेश देने की रणनीति है कि भाजपा दलित और आदिवासी हित में काम करती है। द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाए जाने का जिक्र दलित और आदिवासी वोटर्स के बीच में किया जा रहा है। 

जाट और मुस्लिम मतदाता पर फोकस, पश्चिम उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में जाट मतदाताओं की संख्या अधिक है। जाट मतदाता को साधने के लिए जाट समुदाय से आने वाले जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति बनाया तो उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी को बनाया है। भूपेंद्र चौधरी भी जाट बिरादरी से ही हैं। मुस्लिम मतदाताओं को साथ लाने के लिए भी भाजपा ने पिछड़े मुस्लिमों को साथ जोड़ने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।