Thursday, October 28, 2021
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नरम से सख्त होते शिवराज!

भोपाल, 22 सितंबर (ंआईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सियासत में पहचान सरल, सौम्य और नरम मिजाज के नेता की रही है, मगर अब उनका अंदाज बदल चला है। जनता तक सरकार की योजनाएं और सुविधाएं पहुंचाने की बड़ी जिम्मेदारी नौकरशाहों पर होती है, यही कारण है कि चौहान ने अब सरकारी मशीनरी में कसावट लाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। वहीं कांग्रेस शिवराज के बदलते अंदाज पर तंज कस रही है।

राज्य में शिवराज सिंह चौहान को चौथी बार सत्ता संभाले लगभग डेढ़ साल से ज्यादा का वक्त गुजर गया है। इस दौरान राज्य को कोरोना महामारी के अलावा बाढ़ की विभीशिका का सामना करना पड़ा है। एक तरफ जहां जनता को समस्याओं से दो-चार होना पड़ा तो दूसरी तरफ सरकारी मशीनरी की खामियां भी सामने आईं। इसकी बड़ी वजह सरकार के नरम रुख को माना गया।

शिवराज की छवि राजनीति में नरम राजनेता की है, मगर अब उनके तेवर बदल चले हैं। बदलता रुप पहली बार निवाड़ी के पृथ्वीपुर में सामने आया था, जहां उन्होंने आवास योजना में मिली शिकायत पर एक साथ तीन अफसरों को मंच से निलंबित करने का फरमान सुना दिया था।

इसके बाद मुख्यमंत्री के तेवर बीते दिनों हुई अफसरों की वीडियो कॉफ्रेंसिंग में दिखे, जब उन्होंने सख्त लहजे में उन अफसरों को फटकार लगा डाली जिनके जिलों में तमाम तरह की गड़बड़ियां और प्रशासनिक ढील नजर आई। इतना ही नहीं उन्होंने उन अफसरों पीठ भी थपथपाने में कसर नहीं छोड़ी जिनकी कार्यशैली अच्छी है।

कुल मिलाकर चौहान की बीते कार्यकालों में पहचान बेटियांे के मामा और महिलाओं के भाई की रही है। ऐसा सिर्फ यूं ही नहीं हुआ, बल्कि उन्होंने कई ऐसी योजनाएं बनाई जिन्होंने बेटियों और महिलाओं की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया। लाड़ली लक्ष्मी योजना तो देश ही नहीं दुनिया के देशांे में सुर्खियां बनी थी। यही कारण रहा कि उनकी पहचान बेटियों के मामा और महिलाओं के भाई के तौर पर बन गई है।

शिवराज अब तल्ख और सख्त तेवरों के साथ सरकारी मशीनरी चलाने की मंशा बना चुके हैं, बीते कुछ दिनों में ऐसा ही लग रहा है। उनके करीबियों का कहना है कि चौहान जनहित की योजनाओं में किसी तरह का समझौता करने के पक्ष में नहीं होते, वे व्यवस्था में जहां भी खामी नजर आती है उसे मुख्य सचिव इकबाल सिंह के साथ मिलकर सुधार पर जोर देते हैं। अफसरों से उनका सतत संपर्क होता है, तो समस्याओं के त्वरित निपटारे को अहमियत देते हैं। हां इतना जरुरी है कि उनका दिखावे में ज्यादा भरोसा नहीं होता।

राज्य में लगभग पंद्रह माह कमल नाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार रही, उसके बाद शिवराज सत्ता में लौटे तो उनका अंदाज नरम रुख वाला रहा, बीते डेढ़ साल की अवधि में कई खामियां खुलकर सामने आईं। कोरोना महामारी के दौरान कई स्थानों पर बड़ी खामियां सामने आईं, तो वहीं भारी बारिश ने अधोसंरचना को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया। साथ ही निर्माण कार्य घटिया किस्म के होने की भी बातें सामने आईं। इतना ही नहीं अपराध भी बढ़ने के मामले सामने आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री चौहान ने अवैध शराब और नशीले पदार्थों के कारोबार के मामले सामने आने पर इन पर नियंत्रण के लिए ग्राम स्तर तक इंटेलीजेंस नेटवर्क को सशक्त करने पर जोर देते हुए सामुदायिक पुलिसिंग की अवधारणा के क्रियान्वयन को जरुरी बताया। अनुसूचित जाति-जनजाति और कमजोर तबके पर हुए अत्याचार करने वालों के अलावा माफिया और सूदखोरों को सबक सिखाने पर जोर दिया। तो बीते दिनों में जहां भी इस तरह की घटनाएं हुई उनके आरोपियों पर सख्त कार्रवाई हुई है, उनकी संपत्तियों को भी जमींदोज किया गया।

शिवराज के बदलते अंदाज पर पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने तंज कसा और ट्वीट कर कहा, मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार में सुराज का मतलब है, यहां बिना लिए-दिए कोई काम नहीं होता है और सारे काम विलंब से ही होते हैं। कितने आश्चर्य व शर्म की बात है कि 16 वर्श के मुख्यमंत्री को प्रदेश के अधिकारियों को सुराज का पाठ पढ़ाना पड़ रहा है और कहना पड़ रहा है कि मुझे पता है किन लोगों ने पैसे खाये हैं, पैसे लेने वालों को मैं छोडूंगा नहीं।

कमल नाथ ने वीडियो कांफ्रेंस को लेकर कहा, मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि विकास और जनकल्याण के लिए अब हमें फुल फॉर्म में आना पड़ेगा तो शिवराज पिछले 16 वर्ष तक आप कौन से फॉर्म में थे , 16 वर्षो में भी आप फुल फॉर्म में नहीं आ सके? अब तो जनता आपको जीरो फॉर्म में लाने को तैयार बैठी है।

उन्होंने आगे कहा, मध्य प्रदेश में सिर्फ पीएम आवास योजना में ही भ्रष्टाचार नहीं है ,आज हर योजना में ,हर विभाग में ,हर जिले में भ्रष्टाचार चरम पर है ,जहां बिना लिए-दिए कोई काम नहीं होता है।

–आईएएनएस

एसएनपी/एएनएम

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