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उत्तराखंड की राजनीति, मार्च का महीना और पौड़ी गढ़वाल

उत्तराखंड में राजनीतिक अस्थिरता लाता है मार्च का महीना
अब तक के 10 मुख्यमंत्री में से 6 सीएम पौडी गढ़वाल से रहे

सुनील शर्मा

न्यूज डेस्क। उत्तराखंड की राजनीति में मार्च का महीना और पौड़ी गढ़वाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मार्च का महीना इसलिये क्योंकि यह माह उत्तराखंड की राजनीति में अस्थिरता लाने वाला साबित होता है। वहीं पौड़ी गढ़वाल इसलिये क्योंकि उत्तराखंड के अब तब बने 10 सीएम में से 6 मुख्यमंत्री पौड़ी गढ़वाल से संबंध रखते हैं। उत्तराखंड के पहले सीएम बीसी खंडूरी से लेकर वर्तमान सीएम तीरथ सिंह रावत तक पौड़ी गढ़वाल से संबंध रखते हैं।

मार्च का महीना डराता है उत्तराखंड की राजनीति को

उत्तराखंड की राजनीति में मार्च का महीना बेहद महत्वपूर्ण और राजनीतिक दलों और नेताओं को भयभीत करने वाला है। इस साल मार्च के महीने में ही उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद सिंह रावत को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा तो नये सीएम तीरथ सिंह रावत ने पदभार ग्रहण किया। गौरतलब है कि 18 मार्च को त्रिवेंद सिंह रावत बतौर सीएम चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाले थे। मगर मार्च के महीने के मिथक ने उनकी कुर्सी भी छीन ली और उन्हें अचानक इस्तीफा देना पड़ा। लेकिन मार्च के महीने में उत्तराखंड में राजनीतिक अस्थिरता का यह सिलसिला पुराना है। बात करें वर्ष 2016 की तो मार्च का महीना तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार के लिये मुश्किलें लेकर आया। कांग्रेस के 09 असंतुष्ट विधायकों जिनमें मुख्यतौर से मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, विधायक हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल और रेखा आर्य शामिल थीं ने भाजपा का दामन थाम लिया। मार्च केे महीने में ही उत्तराखंड में पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। लगभग चार साल पहले त्रिवेंद सिंह रावत ने मार्च केे महीने में ही सीएम पद की शपथ ली थी। मार्च के महीने में ही गैंरसैंण को कमिशनरी का दर्जा देकर सीएम रावत ने सभी को हैरत में डाल दिया था। उत्तराखंड की राजनीति में इसे बड़ा कदम बताया जा रहा था। मगर मार्च का महीना सीएम त्रिवेंद के लिये भारी रहा और बतौर सीएम चार साल का कार्यकाल पूरा करने से पहले उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। अब नये और उत्तराखंड के 10वें सीएम तीरथ सिंह रावत ने भी मार्च के महीने में ही पदभार ग्रहण किया है।

सीएम पद पर पौड़ी गढ़वाल का रहा दबदबा

2007 में उत्तराखंड के पहले सीएम बीसी खंडूरी से लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत तक उत्तराखंड ने 10 मुख्यमंत्री देखें हैं। खास बात यह है कि उत्तराखंड के सीएम पद पर पौड़ी गढ़वाल के नेताओं का दबदबा कायम रहा और 10 में से 6 मुख्यमंत्री पौड़ी गढ़वाल से रहे हैं। बात करें उत्तराखंड के पहले चुनाव में जीत भाजपा की झोली में जाने के बाद सीएम बने बीसी खंडूरी की तो वह पौड़ी गढ़वाल से ताल्लुक रखते थे। इसके बाद अगले चुनाव में फिर भाजपा जीती और पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र के नेता रमेश पोखरियाल को मुख्यमंत्री पद सौंपा गया। वर्ष 2011 में एक बार फिर से बीसी खंडूरी को सीएम बनाया गया। सूबे के तीसरे चुनाव में कांग्रेस ने जीत का परचम लहराया मगर सीएम पौड़ी गढ़वाल का ही रहा और वहीं के नेता विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाया गया। 2017 में मिली प्रचंड जीत के बाद भाजपा ने पौड़ी गढ़वाल के त्रिवेंद सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया जो पौड़ी गढ़वाल से निकले थे। और अब राज्य के 10वें मुख्यमंत्री बने तीरथ सिंह रावत भी पौड़ी गढ़वाल से ही हैं।

उत्तराखंड की राजनीति से इतर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ भी पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र से ही निकले हैं। वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी पौड़ी गढ़वाल में ही जन्में थे। तो उत्तराखंड के सीएम फैक्ट्री बना पौड़ी गढ़वाल देश की राजनीति में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है और देश के अनेक बडे़ नेता और वरिष्ठ अधिकारी पौड़ी गढ़वाल से ही ताल्लुक रखते हैं।

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