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गुजरात में बढ़ी सियासी सरगर्मी, विपक्ष बोला नाकामी छिपाने का ड्रामा


गुजरात में बढ़ी सियासी सरगर्मी, विपक्ष बोला नाकामी छिपाने का ड्रामा

गांधीनगर। उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों नेतृत्व परिवर्तन की खबरें पर ढकोसला साबित हुईं हों, पर गुजरात में आखिरकार मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का अचनक हटने के कई सियासी मतलब तलाशे जा रहे हैं। यहां सियासी हलचल तेज है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देर शाम अहमदाबाद पहुंचे के बाद गहमा-गहमी बढ़ी हुई है। रविवार को बीजेपी विधायक दल की एक अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसमें गुजरात के नये सीएम के नाम पर मंथन किया जाना है।

इस बीच विपक्ष केद्र सरकार पर गुजरात की तमाम नाकामियों को छिपाने के चलते इस निर्णय को लेना मजबूरी करार दे रहा है। इससे पहले आज दिन जब केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया और राज्य के डिप्टी सीएम नितिन पटेल गांधी नगर में पार्टी के कार्यालय पर पहुंचे तो यह माना गया कि उन्हें हाईकमान से ताजा स्थिति का आंकलन कर तत्काल कोई नया नाम सीएम पद के लिए प्रस्तावित करने का आदेश मिला है।

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अन्य खास नेताओं के भी पार्टी कार्यालय में पहुंचने से संगठन की आंतरिक गतिविधियां तेज है। कहा जा रहा है कि, पार्टी नेता मीटिग करके सूबे में नये सीएम के चयन के मुद्दे पर कुछ नामों पर विचार बना सकते हैं। ताकि इन्हीं चुनिंदा नामों में से हाईकमान का किसी एक नाम पर मुहर लगा सके।

इधर कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल का दावा है कि, भाजपा अपनी नाकामी दबाने के लिए ऐसा सियासी ड्रामा रच रही है। पटेल बोले, अगले साल गुजरात में भी विधानसभा चुनाव होने को है। चुनाव में जनता का का सामना करना पड़ेगा इसलिए सीएम का चेहरा बदलकर वह लोगों के गुस्से से निपटने को प्रयासरत हैं।

हार्दिक पटेल का आरोप है कि, मुख्यमंत्री रूपाणी ने गुजरात में कोई काम नहीं किया। चूंकि केवल एक साल चुनाव के लिए हैं सो यदि मुख्यमंत्री कास चेहरा बदलना ही तो पहले ऐसा कर देना चाहिये। उन्होंने तर्क दिया कि, जनता की नाराजगी को दूर करने के लिए रूपाणी को हटा दिया गया है।

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मालूम हो कि, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने शनिवार को राज्यपाल को अपना त्यागपत्र दे दिया। हालांकि, त्यागपत्र के बाद वह मीडिया से मुखातिब हुए और कहा कि, संगठन और विचारधारा आधारित पार्टी होने के नाते भाजपा में अलग-अलग मौके पर कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां बदलीं जातीं है।

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