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पुलिस गाड़ियां चेक करती रही विकास दुबे बस से निकल गया


पुलिस गाड़ियां चेक करती रही विकास दुबे बस से निकल गया

अमित बिश्‍नोई

पुलिस ने विकास दुबे को पकड़ने के लिए 7 दिनों तक लगातार नाकाबंदी कर बार्डर और जहां भी दुर्दांत अपराधी विकास दुबे की पहुंचने की संभावना थी वाहनों को चेक किया लेकिन इस दौरान पुलिस ने बसों पर ध्यान नहीं दिया.इसी में बैठकर विकास आराम से एक राज्य से दूसरे राज्य पहुंच गया.पुलिस की हर रणनीति को वह फेल करता रहा और आराम से एक से दूसरे राज्य और फिर तीसरे राज्य पहुंच गया.यह बात हम नहीं बल्कि विकास के करीबी प्रभात मिश्रा ने बताई. उसका पुलिस ने गुरुवार को एनकांउटर कर दिया है. हरियाणा में विकास दुबे को पकड़ने पहुंची पुलिस के हत्थे यह चढ़ गया था.पुलिस ने जानकारी दी कि उसकी गाड़ी का टायर पंक्चर हो गया था, जिसे ठीक किया जा रहा था, इसी दौरान प्रभात ने एक पुलिसकर्मी से रिवॉल्वर छीनकर पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. उसने कई राउंड फायरिंग की. पुलिस ने उसे जवाबी कार्रवाई में मार गिराया.

क्या बताया प्रभात ने?
पुलिस के सामने प्रभात ने कई खुलासे किए हैं. उसने बताया कि कैसे एनकाउंटर की रात पुलिसकर्मियों की जघन्य हत्या को अंजाम देने के बाद विकास दुबे 2 दिन तक पुलिस की नाक के नीचे शिवली में ही छिपा रहा. दो दिन बाद वह आराम से बस पकड़कर दिल्ली पहुंच गया, यहां से फरीदाबाद पहुंचा.

दिल्ली की बस पकड़ी
प्रभात ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि घटना के फौरन बाद विकास दुबे और अमर के साथ वे लोग कानपुर के शिवली पहुंचे. यहां वे एक जगह 2 दिन तक छिपे रहे. इसके बाद उन्होंने एक जानने वाले शख्स की गाड़ी ली और औरैया तक पहुंचे. यहां पेट्रोल पंप के पास उन्होंने गाड़ी छोड़ दी और फिर एक बस में बैठकर दिल्ली के बदरपुर पहुंचे. यहां उन्होंने एक रात एक होटल में गुजारी और उसके बाद फरीदाबाद में अंकुर मिश्रा के घर पहुंचे. दरअसल अंकुर मिश्रा का परिवार विकास दुबे का रिश्तेदार है. लेकिन 7 जुलाई को किसी तरह यहां पुलिस ने रेड कर दी. लेकिन विकास तब तक वहां से निकल चुका था.इस तरह वह लगातार पुलिस को चकमा देता रहा.यूपी की पुलिस के साथ वह 7 दिनों तक लुकाछिपी का खेल खेलता रहा. गुरुवार को सुबह महाकाल मंदिर पहुंचा.वहां उसे अरेस्ट कर लिया गया.

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