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धर्म की हो रही राजनीति पर PM Modi चुप्पी तोड़ें: Personal law board

देश में इन दिनों मस्जिदों के मंदिर होने दावों पर चिंता जताते हुए भारत के मुस्लिम समाज का सबसे बड़ा संगठन चिंतित है और प्रधानमंत्री मंत्री मोदी और उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से जहाँ इस तरह के मामले उठाये जा रहे हैं, सवाल किया है कि देश के मौजूदा माहौल में बढ़ते आस्था के टकराव और 50 हज़ार मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाने के किये जा रहे दावों पर अपनी ख़ामोशी तोड़ें। 

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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया ने आज जारी अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री को भरोसा दिलाना होगा कि देश के संविधान,कानून के साथ सभी नागरिकों की धार्मिक आस्था का संरक्षण सहित मुस्लिम समुदाय के धर्मस्थलों की प्रकृति व चरित्र में संसोधन नही किया जाएगा। AIMPLB के राष्ट्रीय महासचिव डॉ मोइन अहमद खान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इतिहास को एक चश्मे से देखने की राजनीति बंद होनी चाहिए,  देश का भला मंदिर-मस्जिद की राजनीति से करने की सोच का विचार सभी को अपने दिमाग से निकलने की जरूरत है। बयां में कहा गया है कि विवादित मुद्दों  का हल सरकार को आगे आकर मध्यस्थता करनी चाहिये वह संसद द्वारा पारित कानून के अंतर्गत मस्जिदों के केयर टेकर राज्यो के मुस्लिम वक़्फ़ बोर्ड व मस्जिदों के मंदिर होने के दावेदारों के मध्य इसे बातचीत कर हल कराए।

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बोर्ड ने कहा कि ताजमहल, कुतुबमीनार किसी समुदाय की नही बल्कि राष्ट्रीय धरोहर है और पुरातत्व विभाग के नियंत्रण में है । बयान में आगे कहा गया है कि जिस ज्ञानवापी मस्जिद से शुरू हुआ विवाद 50 हजार मस्जिदों तक पहुच रहा है यह दुखद है, देश के प्रधानमंत्री को मौन तोड़ना चाहिए। मुस्लिम संगठन ने इसी के साथ ने उत्तरप्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड से भी  कहा है वह मस्जिदों के संरक्षण व अपनी इबादतगाह होने का कानूनी दावा अच्छे अधिवक्ताओं से अदालतों में रखवाए क्योंकि वक़्फ़ बोर्ड निष्क्रिय नजर आ रहा है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ज्ञानवापी मस्जिद सहित अन्य विवादित इबादतगाहों के मसले पर देशभर के बुद्धजीवियों, स्कालर्स व इतिहासकारो के साथ एक वर्चुअल  मीटिंग की तैयारी भी कर रहा है।

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