- प्रधानमंत्री को कुंभ मेला के दौरान शरीर छोड़ने का संकल्प पत्र भेजा
- स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा, मेरे पास शरीर छोड़ने के अलावा और कोई विकल्प नहीं
हरिद्वार। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अपने वादे से मुकरने का आरोप लगाते हुए मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा, गंगा में जमकर खनन हो रहा है और सरकार में संवेदना नहीं है। स्वामी शिवानंद ने प्रधानमंत्री को कुंभ मेला के दौरान शरीर छोड़ने का संकल्प पत्र भेजा है। 1 अप्रैल से महज एक गिलास जल के सहारे अपना अनशन जारी रखने वाले स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा को अविरल रखने की मांगे पूरी न होने पर कुंभ काल में ही वह अपने प्राणों को त्यागने के लिए एक गिलास जल का त्याग भी जल्द कर देंगे।
ब्रह्मलीन पूर्व प्रोफेसर स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद की गंगा रक्षा संबंधी मांगों को पूरा कराने के लिए मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद गत 23 फरवरी से अनशन पर बैठे थे। मांगे पूरी न होने पर ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने विगत आठ मार्च से जल ग्रहण करना भी बंद कर दिया था। 13 मार्च को ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की तबियत खराब होने पर प्रशासन ने उन्हें रामकृष्ण मिशन अस्पताल कनखल में भर्ती कराया था। 13 मार्च से ही मातृसदन के संस्थापक परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने अनशन शुरू कर दिया था।
एक अप्रैल से महज एक गिलास जल के सहारे अपना अनशन जारी रखने वाले मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने पीएम मोदी पर गंगा की अविरलता के लिए किये वादे से मुकरने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पीएम के वादा करने के बाद भी गंगा में जमकर खनन किया जा रहा है। सरकार में संवेदना नहीं हैं। स्वामी शिवानंद ने प्रधानमंत्री को कुंभ मेला के दौरान शरीर छोड़ने का संकल्प भेजा है। इस पत्र में उन्होंने शरीर त्यागने के सौ कारण बताये हैं। इस पत्र की एक प्रतिलिपी का आश्रम में सुरक्षित रखवाने वाले स्वामी शिवानंद का कहना है कि उनकी मौत के बाद ही पत्र उजागर किया जायेगा। स्वामी शिवानंद का कहना है कि गंगा संरक्षण को लेकर मातृसदन लगातार बलिदान देता आ रहा है पर सरकार में संवेदना ही नहीं है। हो सकता है कि मेरे शरीर छोड़ने से ही सरकार की संवेदना जाग जाए।

