इंदिरा की राजनीति आज भाजपा के लिए बनी हथियार
Gujarat Chunavi Dangal – गुजरात मे इस साल के अंत मे विधानसभा चुनाव होने को हैं। पक्ष विपक्ष आपस मे भिड़े हुए हैं। सत्ताधारी भाजपा विगत 30 सालों से गुजरात मे अपना दबदबा बनाए हुए हैं। वही कांग्रेस की बात करे तो यह गुजरात मे अपनी पुनर्वापसी को लेकर कोशिश कर रही है। वही अगर हम इन दोनों दलों के जबरदस्त लीडर की बात करे तो उनमें काफी समानता दिखाई देती है। कांग्रेस लीडर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जो अपने समय से लेकर आज तक चर्चा का विषय बनी हुई है। वही भाजपा के लीडर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो इस समय चर्चा का विषय है। यह दोनो सिर्फ लीडर नहीं बल्कि जनता के बीच अपनी उम्दा छवि को लेकर चर्चा में रहने वाले राजनेता है।
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इंदिरा गांधी और नरेंद्र मोदी दोनो समान राजनीतिक पथ पर चल रहे हैं और कही न कही इनकीं रणनीति भी समान है। जिस प्रकार इंदिरा गांधी के समय मे कांग्रेस ने जनता के दिल मे अपनी जगह बना रखी थी उसी प्रकार आज मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने जनता के दिल मे अपनी जगह बना ली है और लोगो को भाजपा से हिंदुत्व के नाम पर एकजुट अपनी पार्टी से बांध लिया है। भाजपा नेता नरेंद्र मोदी आज राजनीति भले ही नए ट्रेंड के साथ नए स्टाइल को अपनाकर कर रहे हो लेकिन उनके राजनीतिक करने का तरीका बिल्कुल इंदिरा गांधी की तरह है। मोदी बिल्कुल इंदिरा गांधी की तरह मंच से जनता को बांधने की शक्ति रखते हैं और वह उन्हीं के अंदाज में आम नागरिकों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं।
इंदिरा गांधी हमेशा लोगो के बीच जाकर लोगो से जुड़ती थी उन्हें जमीनी स्तर पर समझने की कोशिश करती थी उनके साथ एक आम नागरिक की तरह खड़ी होती थी। वही अगर हम बात भाजपा की करे तो मोदी ने इंदिरा गांधी की तरह जमीनी स्तर की राजनीति की ,वह लोग से व्यक्तिगत तौर पर जुड़े और उनके लिए मोदी उनके बीच के लीडर बने। जैसे गरीबी हटाओ के नारे के साथ इंदिरा गांधी लोगो की आवाज बनी थी। भाजपा और कांग्रेस के नारे भी एक समान है उनमें कोई विशेष फर्क नहीं है। उदाहरण के लिए एक अगर हम समझे तो भाजपा का आज का नारा है कांग्रेस हटाओ, मोदी लाओ, देश बचाओ। और 1971 का नारा था गरीबी हटाओ, इन्दिरा लाओ, देश बचाओ।

