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PK की बेचैनी

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अमित बिश्नोई
पिछले कुछ हफ़्तों से पूर्व चुनावी रणनीतिकार और 2014 में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर मुख्य धारा के टीवी मीडिया में जिसे आजकल गोदी मीडिया के रूप में भी लोग सम्बोधित करने लगे हैं, छाये हुए हैं। प्रशांत किशोर को इतनी फुटेज, इतना महत्व तब भी नहीं मिला होगा जब वो 2014 में वो भाजपा के रणनीतिकार थे, मीडिया में उनका महत्व कुछ समय पहले तक भी नहीं था लेकिन अचानक से उनका चेहरा हर टीवी चैनल पर दिखाई देने लगा जिसमें एक बात वो लगातार बोल रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी तीसरी बार चुनाव जीत रहे हैं और भाजपा की सीटें पिछली बार से कम नहीं बल्कि बढ़ सकती हैं. प्रशांत किशोर के अचानक टीवी चैनलों छा जाने से हर किसी के ज़हन में एक सवाल तो उठा ही कि अचानक प्रशांत किशोर टीवी मीडिया के इतने चहेते कैसे बन गए, जिस तरह से प्रशांत किशोर के साथ इंटरव्यू करने और उन्हें 24 घंटे चलाने की चैनलों में होड़ लग गयी वैसी होड़ तो प्रधानमंत्री मोदी के साथ इंटरव्यू करने की मीडिया हॉउसों में ही देखी जा सकती है. ऐसे में पता नहीं प्रशांत किशोर कैसे करण थापर के हत्थे कैसे लग गए, वायर के लिए करण थापर ने प्रशांत किशोर का जो इंटरव्यू किया उसने PK की कलई खोल कर रख दी. करण थापर के सवालों के जवाबों में प्रशांत किशोर ऐसा उलझे कि भड़क उठे और लगातार करण थापर को चैलेन्ज करने लगे. चलिए आगे बढ़ने से पहले आपको बता दें कि करण थापर वही पत्रकार हैं जिनके साथ आजके प्रधानमंत्री मोदी जी ढाई मिनट बाद ही इंटरव्यू ख़त्म कर दोस्ती बानी रहे की बात कहते हुए चले गए थे. करण थापर के उस इंटरव्यू के दौरान मोदी जी पानी पीने पर मजबूर हो गए थे और संयोग से प्रशांत किशोर ने भी इंटरव्यू के दौरान दो बार पानी पिया। जो सोशल मीडिया पर बुरी तरह वायरल भी हुआ.

प्रशांत किशोर का इस तरह भड़कना कहीं न कहीं इस सवाल को और भी मज़बूत कर गया कि देश में प्रशांत किशोर के लगातार हो रहे साक्षात्कारों को लेकर जो बातें चल रही हैं उनमें कहीं न कहीं कुछ सच्चाई तो है. करण थापर के इंटरव्यू के बाद प्रशांत किशोर सोशल मीडिया पर ट्रोल होने लगे जिसकी वजह से PK और झल्ला गए बिलकुल उसी तरह जैसे करण थापर के सवालों पर झल्ला गए थे. दरअसल प्रशांत किशोर लगातार एक बात कह रहे हैं कि प्रधानम्नत्री की छवि में गिरावट भले ही आयी है लेकिन वो लगातार तीसरी बार आसानी से सरकार बना रहे हैं, प्रशांत किशोर किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं हैं NDA की सीटें कम हो सकती हैं बल्कि उनका तो ये भी कहना है कि इसमें इज़ाफ़ा ही होगा। करण थापर ने उनसे यही सवाल किया था कि वो अपनी इस बात पर कितने प्रतिशत तक भरोसा करते हैं क्योंकि इससे पहले भी उनकी कही हुई बातें और दावे गलत साबित हुए हैं. PK करण थापर की इस बात पर भड़क गए, तब करण थापर ने याद दिलाया कि उन्होंने गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के सफाये की बात कही थी, प्रशांत किशोर इस पर और भी भड़क गए और चुनौती देने लगे कि इस बात का वीडियो दिखाइए वरना माफ़ी मांगिये, जबकि प्रशांत किशोर ने ये दावा अपने ट्विटर हैंडल पर किया था और उनकी ही पोस्ट पर इंडियन एक्सप्रेस और दुसरे बड़े अखबारों ने खबर बनाई थी लेकिन प्रशांत किशोर झल्लाहट में बार बार वीडियो दिखाने की बात कर रहे थे, इस झल्लाहट में शायद वो ये भूल गए कि ये बात तो उन्होंने खुद अपने ट्विटर अकाउंट पर कही थी. जब बात ट्विटर पर कही गयी है तो वीडियो कहाँ से आएगा लेकिन प्रशांत किशोर बिलकुल उस चोर की तरह बर्ताव कर रहे थे जो रंगे हाथों पकड़ा जाने के बावजूद लगातार कहता है कि उसने चोरी नहीं की।

प्रशांत किशोर ने अपनी बात को, अपने दावे को साबित करने के लिए आज योगेंद्र यादव के आंकलन की मदद ले रहे हैं और कह रहे कि देखिये योगेंद्र यादव भी यही कह रहे कि मोदी जी तीसरी बार प्रधानमंत्री बन रहे हैं , सवाल ये है कि प्रशांत किशोर ये बात साबित करने के लिए इतना बेचैन क्यों हैं कि केंद्र में भाजपा की सरकार बन रही है. अगर बन रही है तो इसमें बुराई क्या है. जनता जिसे वोट करेगी वो जीतेगा लेकिन प्रशांत किशोर जिस तरह इस बात को साबित करने पर लगे हैं उस तरह तो भाजपा के नेता भी नहीं करते। फिर प्रशांत किशोर क्यों ऐसा कर रहे हैं, ममता बनर्जी के लिए जब वो दावा कर रहे थे तब समझ में आने वाली बात थी कि वो उनका चुनाव लड़वा रहे थे लेकिन यहाँ पर तो ऐसी कोई बात नहीं है. न तो वो भाजपा को चुनाव लड़वा रहे हैं, न ही अब किसी तरह की कोई एजेंसी चला रहे हैं जो ओपिनियन और एग्जिट पोल करती है, PK खुद कहते हैं कि वो सैफोलॉजिस्ट नहीं हैं. तो फिर किस बात की बेचैनी कि अपनी बात को साबित करने के लिए दूसरों के बयानों की मदद ले रहे हैं। जिन योगेंद्र यादव की वो बात कर रहे हैं वो तो इस फील्ड में रह भी चुके हैं, दुसरे उन्होंने जो अपना फाइनल आंकलन किया है उसके मुताबिक भाजपा अगर बहुत अच्छा करेगी तब NDA 272 तक जा सकती है लेकिन बदलाव जिस तरह हो रहा उसमें इस बात की पूरी सम्भावना है कि शेष दोनों चरणों में बहुमत NDA से दूर भी जा सकता है जिसकी सम्भावना ज़्यादा है लेकिन प्रशांत किशोर ने योगेन्द यादव के आंकलन का एक ही हिस्सा कोट किया।

सवाल फिर वही है कि वो इस बात के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं कि चुनाव को लेकर अपना आंकलन करें, सीटों की घोषणा करें, भाजपा को 300 या 350 जो भी सीटें वो देना चाहें दें , कांग्रेस को वो 50-60 सीट देना चाहें दें लेकिन जब कोई पत्रकार उनके पुराने दावों पर सवाल उठाये तो उसमें भड़कने की क्या ज़रुरत है और खुलेआम झूठ बोलने की क्या ज़रुरत है. आप जैसे आज आंकलन कर रहे हैं वैसे पहले आंकलन किया था, पहले गलत हो गया था आज सही भी हो सकता है. आज आपको मजबूर होकर ये कहना पड़ा रहा है कि देखिये योगेंद्र जी भी वही कह रहे हैं जो हम कह रहे हैं लेकिन योगेंद्र यादव तो अपने पहले के दावों के गलत होने पर नहीं भड़के, उनसे भी सवाल किया गया कि आप तो पिछली बार भी मोदी जी को हरा रहे थे, वो सवाल पूछने वाले से नाराज नहीं हुए, और न ही ये दलील दी कि फलां फलां ने भी तो मोदी जी के हारने की बात कही थी. ये आपका आंकलन है, उसपर कायम रहिये, उसपर सवाल उठने पर इतनी उत्तेजना क्यों?

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