Prashant Kishore: कविता की पंक्तियों से PK ने बताया, नितीश से कैसी हुई बात

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तीन दिन पहले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच मुलाकात के बाद और इस मुलाक़ात की बात से इंकार-इकरार के बाद PK ने रामधारी सिंह दिनकर की कविता की दो पंक्तियों को ट्वीट कर यह बताने की कोशिश की है कि उनकी पुराने साथी नितीश कुमार से हुई मुलाक़ात का नतीजा क्या रहा. पंक्तियों से तो ऐसा लगता है कि दोनों की बातचीत बनी नहीं और नितीश ने जो भी ऑफर दिया उसे PK ने ठुकरा दिया. 

बता दें कि नितीश से मुलाकात को पहले प्रशांत कुमार ने गोपनीय रखा था लेकिन जब पत्रकारों के सामने नितीश ने इस मुलाकात की पुष्टि कर दी तो PK को मुलकात की बात माननी पड़ी. दोनों की मुलाकात के बाद इस बात के कयास लगाए जाने लगे कि यह दोनों पुराने साथी शायद एकबार फिर साथ आ रहे हैं लेकिन चुनावी रणनीतिकार ने अपने ट्वीट से इस बात के संकेत दे दिए कि ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा, दोनों के बीच किसी भी तरह का गठबंधन नहीं होने जा रहा है. अपनी इस बात को कहने के लिए उन्होंने कविता का सहारा लिया, कविता के माध्यम से PK ने ये कहने की कोशिश की कि मैं लोगों को क्या मुंह दिखाऊंगा।  

नितीश की तरह प्रशांत किशोर ने भी इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया अलबत्ता ये ज़रूर कहा कि अगर वो अपने दावे के मुताबिक बिहार में एक साल में 10 लाख नौजवानों को नौकरी दे देते हैं तो फिर बात बन सकती है. बता दें कि प्रशांत किशोर ने 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में नितीश कुमार के लिए चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम किया था, उन्हें कामयाबी भी दिलाई थी. इनाम स्वरुप नितीश कुमार ने उन्हें कैबिनेट मंत्री के दर्जे के साथ ही मुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था. बाद में प्रशांत किशोर 2018 में जदयू में शामिल हुए , कुछ ही दिनों बाद उन्हें जदयू का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बना दिया गया लेकिन सीएए एनआरसी मुद्दे पर नितीश कुमार से मतभेद को लेकर उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया.

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