नई दिल्ली। जहांगीरपुरी हिंसा के लिए पीएफआई ने साजिश रची थी। पीएफआई ने इसके लिए फंडिंग भी की थी। खुफिया और क्राइम ब्रांच की जांच में यह बात सामने आई है। सूत्रों की मानें तो पीएफआई ने घटना वाले दिन से कई दिन पहले हिंसा की साजिश रची गई थी। यह भी जानकारी सामने आई है कि हनुमान जयंती से एक दिन पहले ही पीएफआई के सदस्यों ने जहांगीरपुरी में गुपचुप तरीके से एक बैठक कर शोभायात्रा को रोकने और उसमें हिंसा फैलाने की पूरी तैयारी की थी।
बैठक में सोनू चिकना,अंसार और सलीम सहित दो दर्जन से अधिक लोग शामिल हुए थे। क्राइम ब्रांच और खुफिया विभाग हालांकि अभी कुछ भी कहने से पूरी तरह से बच रहा है। लेकिन जिस दिशा में जांच चल रही है उससे अब पूरी तरह से यह तो साफ हो गया है कि इस पूरी घटना के पीछे पीएफआई का ही हाथ था। बता दें कि इससे पहले फरवरी 2020 में सीएए और एनआरसी के विरोध में हुए दंगे के अलावा शाहीन बाग में हुए प्रदर्शन में भी पीएफआइ का नाम सामने आया था।
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पीएफआई ने 2020 में हुए दंगे के लिए फंडिंग की थी। वहीं शाहीन बाग में कई महीने तक चले घरने के लिए भी पीएफआई ने लाखों की फंडिंग की थी। उसी की तर्ज पर अब हनुमान जयंती वाले दिन जहांगीरपुरी हिंसा के लिए भी पीएफआई ने फंडिंग कर शांत माहौल में आग लगाने का काम किया। अब क्राइम ब्रांच और खुफिया विभाग उन लोगों केा तलाश रहा है जो पीएफआई की इस बैठक में शामिल हुए थे। वहीं यह पता करने का प्रयास किया जा रहा है कि इस पूरी साजिश के पीछे मुख्य सूत्रधार कौन है।

