स्कंद पुराण में द्वादशी के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या जैसे महापाप नष्ट हो जाते हैं। ब्रह्म पुराण’ के 118 वें अध्याय में शनिदेव का कहना है कि शनिवार को जो व्यक्ति नियमित रूप से पीपल वृक्ष को स्पर्श करेंगे। उनके सभी कार्य सिद्ध होंगे। उसको शनि की कोई भी पीड़ा नहीं होगी। शनिवार को सुबह पीपल वृक्ष का स्पर्श करने से ग्रहजन्य पीड़ा भी नष्ट होती हैं। शनिवार के दिन पीपल वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ का 108 बार जप करने से दुख, कठिनाई और ग्रह दोषों का प्रभाव शांत होता है। हर शनिवार को पीपल जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। नौकरी – व्यवसाय में सफलता, आर्थिक समृद्धि एवं कर्ज मुक्ति के लिए शनिवार के दिन पीपल में दूध, गुड, पानी मिलाकर चढाए। इस दौरान प्रार्थना करें कि ‘हे प्रभु ! गीता में कहा है कि वृक्षों में पीपल मैं हूँ। हे भगवान!मेरे जीवन में परेशानी है। आप कृपा करके परेशानी दूर करने की कृपा करें। पीपल का स्पर्श करते हुए उसकी प्रदक्षिणा करें।
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पति की आयु लम्बी हो इसलिए सुहागन स्त्रियां शाम को सूरज जब अस्त होता है तो उस समय सुहागन देवियों को अपना सिर ढ़क कर पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना चाहिए। जिस दिन सुहागन महिलाएं उपवास हो उस दिन पीपल के नीचे एक बार जरूर जाना चाहिए। अपनी मनोकामना के बारे में बोल कर उसको पूरा करने की कामना करनी चाहिए। इससे मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। घर में अगर क्लेश है और बीमारी पीछा नहीं छोड़ रही है तो गुड,पानी और तेल को मिलाकर लोटे में भरकर पीपल पर डालना चाहिए। इससे सभी प्रकार की व्याधियों के अलावा क्लेश से भी छुटकारा मिलेगा। प्रत्येक सोमवार को पीपल पेड़ पर जल में काला तिल डालकर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। ऐसा करने से जीवन में कभी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती।
