काबुल। एक तरफ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के चीफ और कुछ पाक सैन्य आला अधिकारी अफगानिस्तान में हैं, वहीं पंजशीर घाटी पर तालिबान का कब्जा कराने के लिए पाक सेना से मदद दिये जाने की खबरें आ रहीं हैं। अफगानिस्तान के पंजशीर घाटी में तालिबान के कातिलाना अटैक में मदद के लिए पाक सेना की ओर से बमबारी किये जाने के साथ-साथ ड्रोन से हमला किये जाने बात सामने आयी है। कहा जाता है कि पाकिस्तान ने अपने सबसे बड़े दुश्मन अमरुल्ला सालेह के निवास स्थान पर फाइटर जेट और ड्रोन से हमला बोला है। इस दौरान तालिबानी हमले में पंजशीर घाटी के विद्रोही लीडर अहमद मसूद के स्पोक्सपर्सन और जर्नलिस्ट फहीम दश्ती की मृत्यु हो गई। मसूद ने इसके बाद कहा कि, कहा है कि हम तालिबान के साथ बातचीत और हिंसा को रोकने के लिए पहल करने को तैयार हैं।
गौर हो कि एक जमाने में अफगानिस्तान के वाइस-प्रेसिडेंट रह चुके अमरुल्लाह सालेह भी अपने देश के स्वाभिमान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वह पंजशीर घाटी में तालिबान लड़ाकों के खिलाफ रेजिस्टेंस सेना की अगुवाई में हैं। इसी दौरान ब्रिटिश न्यूज पेपर डेली मेल में उनके प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि, -यदि पंजशीर में संघर्ष के दौरान वो इंजर्ड हो जाते हैं तो उन्होंने अपने गाड्र्स को अपने सिर में दो गोलियां मार देने का निर्देश पहले ही दे दिया है। उनका कहना है कि, मैं तालिबान के सामने जीते-जी आत्मसमर्पण नहीं करूंगा।
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अफगान मीडिया की ओर से आ रही खबरों के अनुसार पाकिस्तानी हेलिकॉप्टर और ड्रोन विमान निरन्तर पंजशीर घाटी में तालिबान की हेल्प के लिए बमबारी कर रहे हैं। इसी बीच अमरुल्ला सालेह के निवास को अटैक किया गया। कहा जा रहा है कि पाकिस्तानी अटैक के बाद अमरुल्ला सालेह पंजशीर के पहाड़ों में कहीं सेफ जोन पर चले गए हैं। पाकिस्तानी अटैक ऐसे वक्त पर हुआ है जबकि पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ जनरल फैज आजकल काबुल में ही हैं।
सालेह ने अपने पंजशीर पहुंचने के बारे में अखबार में लिखा है कि, वे दो सेना की गाडिय़ों और दो पिकअप ट्रक से वहां के लिए चले, इस दौरान दो दफा इस कॉन्वॉय पर अटैक हुआ। लिखा है कि हमने बहुत दिक्कतों के बावजूद नॉर्दन पास को पार कर लिया। यहां भी हमारे ऊपर दो बार अटैक हुए पर हम लोग बच गए।
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सालेह के राइट-अप के मुताबिक, जब वह पंजशीर पहुंच गए तो उन्हें मैसेज मिला कि हमारे समुदाय के बुजुर्ग एक मस्जिद में एकत्र हैं। हम वहां पहुंचे और उनसे लगभग एक घंटे तक हालातों पर चर्चा की। सभी हमारा साथ देने को तैयार थे। बताया कि बीते बीस सालों से पंजशीर एक पर्यटक स्थल था। पर यहां हमारे पास न तो कोई मिलिट्री संसाधन थे और न ही आर्मस, पर मैंने वहां पर अहमद मसूद के साथ मिलकर संघर्ष की रूपरेखा तैयार की और अभी तक सब ठीक ही आगे बढ़ रहा है।

