Site icon Buziness Bytes Hindi

Uttarakhand Observatory: ऑब्जर्वेटरी वेधशाला से अंतरिक्ष और विश्व की हर गतिविधियों पर हमारे वैज्ञानिक रखेंगे नजर

देहरादून। उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में अंतरिक्ष गतिविधियों पर नजर रखने वाली नई टैक्नॉलाजी से लैस वेधशाला ‘ऑब्जर्वेटरी’ लगाई जाएगी। स्टार्टअप दिगंतारा इसे स्थापित करेगा। यह वेधशाला पृथ्वी की परिक्रमा लगा रही 10 सेमी जितने आकार की छोटी वस्तु पर भी नजर रखने में सक्षम है। स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस ‘एसएसए’ वेधशाला अंतरिक्ष मलवे व सैन्य उपग्रहों की सभी गतिविधि पर कड़ी नजर रखने में मददगार साबित होगी। दिगंतारा के सीईओ अनिरुद्ध शर्मा ने बताया कि उत्तराखंड में यह वेधशाला एसएसए निगरानी के अंतर को खत्म कर देगी। क्योंकि अभी ऑस्ट्रेलिया से लेकर दक्षिणी अफ्रीका तक इस प्रकार की कोई ऐसी कोई सुविधा नहीं है।

Read also: RBI Repo Rate: इस साल महंगाई से नहीं मिलेगी निजात, रेपो दर में आरबीआई कर सकता है 0ः60 प्रतिशत की वृद्धि

वर्तमान में इस क्षेत्र में अमेरिका का वर्चस्व बना हुआ है। अंतरिक्ष गतिविधियों पर नजर रखने वाली ऐसी सबसे अधिक वेधशालाएं उसके पास मौजूद हैं। उसकी यह वेधशालाएं कई स्थानों पर तैनात हैं और कामर्शियल कंपनियां इनके लिए इनपुट मुहैया कराती हैं।
शर्मा ने बताया कि इस वेधशाला की सहायता से हमारे वैज्ञानिक गहरे अंतरिक्ष की हर एक हलचल पर नजर रखेंगे। खासतौर से भूस्थैतिक, मध्यम-पृथ्वी और उच्च.पृथ्वी की कक्षाओं की गहन गतिविधि की निगरानी इससे की जा सकेगी। इसकी मदद से उपग्रहों व अन्य अंतरिक्ष यानों के बीच भिड़ंत से भी बचा जा सकेगा। उनकी लोकेशन, गति और ट्रैजेक्टरी के बारे में सटीक अनुमान लगाए जा सकेंगे। उत्तराखंड सरकार में उद्योग निदेशक सुधीर नौटियाल ने बतया कि हमें उत्तराखंड में भारत की पहली समर्पित अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता ‘एसएसए’ वेधशालाओं की स्थापना में दिगंतारा पर गर्व है। बता दें कि ये वेधशाला बन जाने से चीन पर भी भारत नजर रख सकेंगा। चीन की प्रत्येक गतिविधियों पर भारत पैनी नजर के साथ यह भी जान सकेगा कि आखिर उसकी अंतरिक्ष में किस प्रकार की गतिविधियां संचालित हैं। अभी तक भारत के पास ऐसी कोई टैक्नालाजी नहीं हैै जिससे कि वह चीन के जासूसी उपग्रहों की जासूसी कर सके। लेकिन इस वेधशाला के स्थापित होने के बाद चीन की मुश्किलें जरूर बढ़ जाएगी।

Exit mobile version