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‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने बदली रणनीतिक तस्वीर, जरूरत पड़ी तो होगा अगला चरण: सेना प्रमुख

Operation Sindoor

NDA की 150वीं पासिंग आउट परेड में जनरल उपेंद्र द्विवेदी का बड़ा बयान, कहा- सेना हर चुनौती के लिए तैयार
भविष्य के युद्धों में ड्रोन, AI, साइबर और सूचना युद्ध होंगे निर्णायक, थिएटर कमांड पर भी दिया अपडेट

पुणे। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति संघर्ष विराम जैसी है, लेकिन यदि देश की सुरक्षा के सामने कोई नई चुनौती खड़ी होती है तो सशस्त्र बल अगली कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनके अनुसार इस अभियान ने यह साबित कर दिया है कि भारत किसी भी उकसावे या आतंकी चुनौती का जवाब निर्णायक और प्रभावी तरीके से देने में सक्षम है।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला में आयोजित 150वीं पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने नवोदित अधिकारियों से कहा कि वे अपने सैन्य जीवन की शुरुआत ऐसे समय में कर रहे हैं, जब भारतीय सेनाओं ने जवाबी कार्रवाई का एक नया मानक स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े इस विश्वास और प्रतिष्ठा को बनाए रखना नई पीढ़ी के सैन्य अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

समारोह में 355 कैडेटों ने शानदार मार्च पास्ट किया। इस अवसर पर वायुसेना के लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों ने फ्लाईपास्ट कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। स्काईडाइविंग और एरोबेटिक्स टीमों ने भी दर्शकों को रोमांचित किया।

अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आज किसी भी सैन्य गतिविधि को छिपाकर रखना आसान नहीं है, क्योंकि तकनीक के माध्यम से हर गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी जाती है। ऐसे में सैन्य अभियानों की योजना बनाते समय सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा को भी समान प्राथमिकता देनी होगी।

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों के बल पर नहीं लड़े जाएंगे। साइबर स्पेस, अंतरिक्ष, सूचना तंत्र, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और जनमत को प्रभावित करने वाली रणनीतियां भी सैन्य अभियानों का अहम हिस्सा बनेंगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और ऑटोमेशन को उन्होंने भविष्य की सैन्य ताकत का प्रमुख आधार बताया।

सेना प्रमुख ने ‘ईगल ऑन द आर्म’ की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय सेना का लक्ष्य हर सैनिक को ड्रोन संचालन में दक्ष बनाना है। इसके लिए सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने थिएटर कमांड व्यवस्था पर भी जानकारी दी और कहा कि इस दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। उम्मीद है कि अगले दो से तीन वर्षों में तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन की यह नई व्यवस्था जमीनी रूप ले सकती है, जिससे सैन्य अभियानों की प्रभावशीलता और समन्वय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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