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वृक्षारोपण करके ही जीव सृष्टि को संरक्षित किया जा सकता है: मुख्यमंत्री


वृक्षारोपण करके ही जीव सृष्टि को संरक्षित किया जा सकता है: मुख्यमंत्री

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी कहा है कि अधिक से अधिक वृक्षारोपण करके ही जीव सृष्टि को संरक्षित किया जा सकता है। जनसहभागिता के माध्यम से ही वृक्षारोपण जैसे वृहद कार्यक्रम को सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश का ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए संकल्पित है।

मुख्यमंत्री आज यहां मुख्यमंत्री कुकरैल वन में ‘मिशन वृक्षारोपण-2020’ के शुभारम्भ अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने हरिशंकरी के वृक्षों का रोपणकर ‘मिशन वृक्षारोपण-2020’ का शुभारम्भ किया। ज्ञातव्य है कि पीपल, बरगद व पाकड़ के सम्मिलित रोपण को हरिशंकरी कहते हैं। ‘मिशन वृक्षारोपण-2020’ के तहत आज 05 जुलाई, 2020 को एक दिन में 25 करोड़ से अधिक वृक्षारोपण किए जाने का लक्ष्य है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ‘वनस्पति वैविध्य महाअभियान-2020’ पुस्तक का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की तिथि का विशेष महत्व है। भारत के ज्ञान की परम्परा के प्रतीक भगवान वेदव्यास की आज जन्मतिथि भी है। व्यास पूर्णिमा गुरु पूर्णिमा के रूप में जानी जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण मिशन के अन्तर्गत व्यापक जनसहभागिता एवं अन्तर्विभागीय समन्वय के माध्यम से प्रदेश में एक दिन में 25 करोड़ से अधिक औषधीय, फलदार, पर्यावरणीय, छायादार, चारा औद्योगिक व प्रकाष्ठ की दृष्टि से महत्वपूर्ण 201 से अधिक प्रजातियों के पौधे रोपे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइड लाइन के तहत वृक्षारोपण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में पूरा विश्व वैश्विक महामारी कोविड-19 से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि इम्युनिटी पावर को बढ़ाकर कोरोना वायरस से बचा जा सकता है। उन्होंने भारत के आयुर्वेद का जिक्र करते हुए कहा कि अनेक ऐसी औषधीय वनस्पतियां हैं, जिनका काढ़ा पीने से हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से वृक्षारोपण कार्यक्रम को एक नई गति प्राप्त हुई है। जल संरक्षण में भी वृक्षारोपण का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत 30 लाख आवास उपलब्ध कराए गए हैं। इन आवासों में सहजन के पौधे को रोपित करने का कार्य किया गया है। उन्होंने सहजन के महत्व को बताते हुए कहा कि इसकी फली का सेवन करने से कुपोषण से बचा जा सकता है।

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