लखनऊ : Old Pension Scheme – पुरानी पेंशन पर एक राय रखने वाले कर्मचारी नेता राजनीतिक तौर पर अलग हो गए है। पिछले एक दशक में पुरानी पेंशन प्रदेश में सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। कर्मचारी संगठन अपने मांग में इसको हमेशा शामिल करते रहे हैं लेकिन राजनीतिक तौर पर उनकी राह अलग है। पिछले दिनों समाजवादी पार्टी ने जब पुरानी पेंशन को लेकर ऐलान किया तो प्रदेश में शिक्षक से लेकर राज्य कर्मचारियों तक ने उनको बड़े स्तर पर अपना समर्थन दिया। स्थिति जाती थी कई कर्मचारियों ने अपने घर के सामने बोर्ड लगा दिया किया पेंशन विहीन कर्मचारी का आवास है यहां पर वही लोग वोट मांगने आए जिसकी पार्टी पुरानी पेंशन को अपने घोषणा पत्र में शामिल कर रही है। यहां तक लिखा था कि अन्य दल वोट मांग कर शर्मिंदा ना करें या शर्मिंदा ना हो।
मौजूदा समय में पीडब्ल्यूडी के भरत सिंह रामराज दुबे अटेवा पेंशन बचाओ मंच के विजय बंधु राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद समेत कई संगठन पुरानी पेंशन बहाली को लेकर समाजवादी पार्टी के साथ खड़ी नजर आ रही है। वहीं स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष शशि मिश्रा, जवाहर भवन इंदिरा भवन कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सतीश पांडे वह महामंत्री सुशील कुमार बच्चा समेत कई नेता इसको महज एक चुनावी जुमला बता रहे हैं। पिछले दिनों इन नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा से मुलाकात भी की थी। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि यह लोग राजनीतिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े है।
पूछ रहे सवाल करेंगे कैसे
स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष शशि कुमार मिश्र पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर पुरानी पेंशन के वादे को महज चुनावी बता रहे हैं। शशि कुमार मिश्र का सवाल है कि जब 2005 से अबतक पुरानी पेंशन के हिसाब से अंशदान ही राज्य सरकार ने जाम नहीं किया तो अब एकसाथ ऐसा कैसे कर सकते हैं ? यह केवल वोट के लिए कर्मचारियों को गुमराह करने जैसा है। सवाल खड़ा करते हैं कि 2005 में जब प्रदेश ने इसे लागू किया तो मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ही थे। जब संभव नहीं तो संगठन के मांगपत्र में पुरानी पेंशन क्यों के जवाब में वह कहते हैं, शायद आगे कोई सरकार सुन ले। शायद केंद्र और राज्य सरकार एकराय होकर रास्ता निकाल लें। वहीं जब उनसे पूछा जाता है कि पुरानी पेंशन और नई पेंशन में कर्मचारियों के लिए अच्छी कौन सी है तो वह स्पष्ट कहते हैं कि पुरानी पेंशन।

