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Crude Oil Crisis: जी-7 के मूल्य-कैपिंग तंत्र से सतर्क हुई तेल कंपनियां, विश्व के देशों की भारत पर नजर

Crude Oil Crisis

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नई दिल्ली। भारत ने कहा कि वो पश्चिमी देशों के उस प्रस्ताव का अध्ययन कर रहा है जिसमें रूसी तेल की खरीद की सीमा तय करने को कहा गया है। हालांकि कई निजी तेल रिफाइनरी अभी से रूसी तेल खरीदने के लिए कतारबद्ध में हैं। दुविधा ये है कि रूसी तेल की खेप पांच दिसंबर के बाद भारत आनी शुरू होगी। जब तक तेल खरीद की सीमा वाला प्रतिबंध प्रभाव में आ चुका होगा। दुनिया की सात अमीर अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के समूह (जी-7) पांच दिसंबर तक रूसी तेल निर्यात पर मूल्य-कैपिंग तंत्र को लागू करने की कोशिश में हैं। यूरोपीय संघ ने रूसी कच्चे तेल के समुद्री आयात पर पहले से प्रतिबंध लगा दिया। भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से रूसी तेल के लिए निर्धारित मूल्य सीमा का पालन करने को लेकर जब पूछा गया तो उनका कहना था कि मुझे लगता है कि सखालिन से तेल लेने पर जापान को छूट है और पाइपलाइन के माध्यम से आने वाले कच्चे तेल पर रोक नहीं है। हमें इसे देखना होगा।

विश्व में चीन के बाद भारत, रूस के दूसरे सबसे बड़े तेल ग्राहक के रूप में उभरकर सामने आया है। कुछ पश्चिमी देशों ने यूक्रेन पर फरवरी के अंत में आक्रमण के बाद से ही मास्को से तेल खरीदने पर रोक लगाई थी। रूस के तेल राजस्व पर अंकुश लगाने की योजना कितनी प्रभावकारी होगी। इसके लिए दुनिया नई दिल्ली के रुख का इंतजार कर रही है। मास्को ने कहा है कि वह किसी ऐसे देश को तेल की आपूर्ति नहीं करेगा जो मूल्य सीमा से सहमत होगा।

इस पूरी कवायद के बीच भारत की तेल कंपनियां फूंक-फूंककर कदम रख रही हैं। कंपनी सूत्रों की माने तो देश की शीर्ष रिफाइनरी इंडियन ऑयल कॉर्प को पांच दिसंबर बाद रूसी तेल के 3-4 कार्गों की डिलीवरी होनी है। जबकि भारत पेट्रोलियम कॉर्प दिसंबर में डिलीवरी को कार्गों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। तेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि भारत को डिलीवरी के आधार पर रूसी तेल मिलता है। जब मूल्य सीमा तंत्र की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।

बीपीसीएल और आईओसी ने इस मामले पर टिप्पणी नहीं की। हालांकि सूत्रों ने बताया कि भारतीय कंपनियों के पास दिसंबर में अधिक रूसी तेल कार्गो डिलीवरी के लिए कम से कम अक्तूबर के अंत तक का समय है।

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