लोकसभा में बुधवार को भारतीय न्याय संहिता (द्वितीय) विधेयक 2023 पास हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लगभग विपक्षविहीन सदन में कहा कि अब किसी मामले में आरोपी को बरी होने के लिए याचिका दाखिल करने के लिए सात दिन का समय मिलेगा और जज को सात दिन के अंदर सुनवाई करनी होगी और अधिकतम 120 दिनों में मामले का ट्रायल होगा।
केंद्रीय गृह मंत्री ने मॉब लिंचिंग एक घृणित अपराध बताते हुए कहा कि इस कानून में हम मॉब लिंचिंग के अपराध के लिए मौत की सजा का प्रावधान कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहली बार, पीएम मोदी के नेतृत्व में मैंने हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली को संचालित करने वाले 150 साल पुराने तीन कानूनों में क्रांतिकारी बदलाव किया है। 1860 में बनी भारतीय दंड संहिता का उद्देश्य न्याय देना नहीं बल्कि दंड देना था। इसके स्थान पर भारतीय न्यायिक संहिता 2023 इस सदन की मंजूरी के बाद पूरे देश में लागू हो जाएगी. इस सदन की मंजूरी के बाद सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 लागू हो जाएगी।
लोकसभा ने बुधवार को तीन आपराधिक कानूनों को बदलने के लिए सरकार द्वारा पेश किए गए विधेयकों को मंजूरी दे दी। लंबी चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह के विस्तृत जवाब के बाद सदन ने भारतीय नागरिक संहिता (बीएनएस) विधेयक, 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) विधेयक, 2023 और भारतीय साक्ष्य बिल को ध्वनि मत से अपनी मंजूरी दे दी। तीनों विधेयक भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1898 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 को बदलने के लिए लाए गए हैं।
बता दें कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (सीआरपीसी) में पहले 484 धाराएं थीं, अब 531 होंगी, 177 धाराओं में बदलाव किया गया है। 9 नए अनुभाग जोड़े गए हैं, 39 नए उप-अनुभाग जोड़े गए हैं, 44 नए प्रावधान और स्पष्टीकरण जोड़े गए हैं, 35 अनुभागों में समय सीमाएँ जोड़ी गई हैं और 14 अनुभाग हटा दिए गए हैं।

