मेरठ। ट्रैक्टर के पीछे लगने वाली ट्रॉलियों का पंजीकरण सिर्फ कृषि कार्य के लिए किया जाएगा। इसका उपयोग अब व्यावसायिक श्रेणी में नहीं होंगी। ट्रॉलियों का इंश्योरेंस कराना होगा और निर्माता को आईआईटी जैसे तकनीकी संस्थान से डबल एक्सेल यानी चार पहियों के ट्रॉली डिजाइन की अनुमति लेनी होगी। इसके बाद वह चार पहियों की ट्रॉली बना सकेगा। दो पहियों की ट्रॉली अब ना तो बनेगी और ना इसका पंजीकरण किया जाएगा। इन प्रमुख बिंदुओं को ट्रैक्टर-ट्रॉली से होने वाले हादसों पर रोक लगाने के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है। रिपोर्ट पर मुहर लगते के बाद इसको पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा।
बता दें कि पिछले दिनों लखनऊ के इटौंजा, कानपुर और लखीमपुर में हादसों में काफी लोगों मौत ट्रैक्टर—ट्राली हादसे में चली गई। सभी हादसों में दो पहिया ट्रॉली शामिल थी। इस प्रकार के हादसों पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर समिति गठित की गई थी। समिति ने कई बिंदुओं पर मंथन करने के बाद पंजाब की नियमावली का अवलोकन किया। अपर परिवहन आयुक्त(प्रवर्तन)वीके सोनकिया ने जानकारी दी कि रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए बैठक हो चुकी है। रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। इस पर मुहर लगने के बाद लागू कर दिया जाएगा।
प्रदेश में ट्रॉलियां बनाने वाली करीब 30 कंपनियां हैं। जो एआरएआई, पुणे से डिजाइन का अप्रूवल प्राप्त करती हैं। इन्हें आईआईटी जैसे तकनीकी संस्थान से डिजाइन की अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा ट्रैक्टर के साथ ट्रॉली का इंश्योरेंस कराने पर जोर दिया जाएगा।
ट्रॉलियों का पंजीकरण सिर्फ कृषि कार्य के लिए होगा। व्यावसायिक श्रेणी में यह पंजीकृत नहीं किया जाएगा। ट्रॉलियों का इंश्योरेंस भी कराना होगा और निर्माता को आईआईटी जैसे तकनीकी संस्थान से डबल एक्सेल यानी चार पहियों की ट्रॉली डिजाइन की अनुमति लेनी होगी।
