डिप्रेशन से जूझ रहा हर व्यक्ति सुसाइड के बारे में नहीं सोचता

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डिप्रेशन से जूझ रहा हर व्यक्ति सुसाइड के बारे में नहीं सोचता

  • अपने पन की कमी की भावना अक्सर बनती है सुसाइड का कारण
  • भारत में सुसाइड करने वालों में पढ़े लिखे लोगों की तादाद बढ़ रही

पारुल शुक्ला

अरे उसने सुसाइड क्यों कर लिया. जरूर वह डिप्रेशन में होगा. डिप्रेशन में सोच नहीं पाया होगा कि यह कदम गलत है. कुछ ऐसे ही विचार आपके जेहन में आते होंगे जब आपकी जानकारी में किसी के सुसाइड कर लेने का केस आता होगा.

लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि डिप्रेशन से जूझ रहा हर व्यक्ति सुसाइड के बारे में नहीं सोचता. डॉक्टर्स की माने तो हर 10 में से 1 या 2 व्यक्ति ही इसके बारे में सोचते हैं.जब भी कोई गुस्से में, निराश या चिंतित होता है या किसी भावनात्मक पीड़ा से गुजर रहा होता है, तो हार मानने के विचार आते हैं.

कुछ लोगों में जुनूनी या भ्रमपूर्ण विचार आ सकते हैं और साथ ही सुसाइड के लिए प्रेरित कर सकते हैं. इंटरपर्सनल थ्योरी के अनुसार, बोझ की भावना के साथ-साथ अपनेपन की कमी की भावना सुसाइड के बारे में सोचने का कारण बनती है. वल्र्ड सुसाइड प्रिवेंस डे पर आधारित एक रिपोर्ट…

क्या है भारत में स्थिति?
भारत में आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस से कुछ पहले आई नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2019 के दौरान देश में 1.39 लाख लोगों ने आत्महत्या कर ली.इनमें से 67 प्रतिशत लोग 18 से 45 साल की उम्र के बीच थे. जान देने वालों में अब पढ़े-लिखे लोगों की तादाद भी बढ़ रही है.

कोरोना के मुकाबले ज्यादा गंभीर स्थिति
देश में कोरोना से मरने वाले लोगों के आंकड़ों को ध्यान में रखें तो आत्महत्या की घटनाएं कोरोना के मुकाबले ज्यादा गंभीर महामारी के तौर पर उभरी हैं. देश के महानगरों में तो परिस्थिति चिंताजनक है. केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से तमाम हेल्पलाइन नंबर जारी होने और जागरुकता अभियान चलाने के बाबवूजद हालात सुधरने की बजाय लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी अपनी एक रिपोर्ट में भारत को ऐसे शीर्ष 20 देशों की सूची में रखा था जहां सबसे ज्यादा ऐसी घटनाएं होती हैं. विडंबना यह है कि भारत के पड़ोसी देशों की स्थिति इसके मुकाबले बेहतर है. देश के पूर्वोत्तर इलाके में स्थित असम, त्रिपुरा और सिक्किम में भी आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़े हैं.

कैसे पहचाने?

  • अब ज्यादा जरूरी है कि हम ये जान पाएं कि अगर किसी में सुसाइड का ख्याल आ रहा है, तो हम इसकी पहचान कैसे कर सकते हैं, ताकि समय रहते उस इंसान को ऐसा कोई कदम उठाने से रोका जा सके.
  • यूं तो आमतौर पर ये समझ पाना आसान नहीं है कि किसी के मन में ऐसा कुछ चल रहा है, लेकिन कुछ संकेत हो सकते हैं, जो इसकी चेतावनी देते हैं.
  • मरने या साथ न होने जैसी बातें करना- डॉ कपूर बताती हैं कि कई लोग जो खुदकुशी पर विचार कर रहे होते हैं, अक्सर इसके बारे में बात करते हैं, जैसे, “बेहतर है कि मैं मर जाऊं”, या “जीवन का कोई मतलब नहीं है.”
  •  कुछ लोग मृत्यु या सुसाइड से जुड़े विषयों पर बात करना या उनके बारे में खोजना शुरू कर देते हैं.

रहन-सहन में बदलाव नजर आना

मूल्यवान संपत्ति देना; मृत्यु की दूसरी तैयारी करना- खुदकुशी करने वाले अक्सर मरने के बारे में बात करते हैं या मरने के बाद क्या होता है. कई मसलों को सुलझाने और अपनी वसीयत तैयार करने की जल्दबाजी कर सकते हैं.

मूड में अचानक बदलाव

जिन लोगों ने अतीत में खुद को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया है, उनके फिर से वैसा कुछ करने का रिस्क होता है. ऐसा भी हो सकता है कि इस बारे में वे बात करने से बचें, खुद को अलग करना चाहें, सुस्त दिखें.

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