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लाॅकडाउन में नहीं मिला काम, दाने-दाने को हुए मोहताज


लाॅकडाउन में नहीं मिला काम, दाने-दाने को हुए मोहताज

लोगों से रुपये मांग कर अपने गांव जा रहा है राजू
जुगाड़ से तय किया पंजाब से मेरठ तक का सफर

मुनीश कुमार

मेरठ। काम के लिये पंजाब परिवार सहित पंजाब में रह रहे थे। मगर इस लाॅकडाउन ने काम-काज बंद करवा दिये। जिस व्यक्ति से पैसे लेने थे उसने रुपये देने से इंकार कर दिया। खाना खाने को भी पैसा नहीं रहा तो पंजाब में रूकना मुश्किल लगने लगा। लोगों से रुपये मांग कर वापस अपने गांव जा रहा हूं, अब वहीं कुछ काम देखूंगा। यह पीड़ा है राजू की जिसने पंजाब से लेकर मेरठ तक का सफर अपने जुगाड़ से किया है। लाॅकडाउन की मार ने उसे बेरोजगार कर दिया तो अपने गांव लौट जाने के अलावा उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा था।

यह दर्द किसी एक राजू का नहीं बल्कि हजारों मजदूर का है जो लाॅकडाउन की मार झेल रहे हैं। कोरोना संक्रमण के कारण देश के विभिन्न राज्यों में लाॅकडाउन लगाया गया है। ऐसे में काम-काज ठप्प होने से सभी परेशान हैं। मगर सबसे अधिक परेशानी हो रही है मजदूर वर्ग को जिसके पास न तो काम है और न ही उसके पास इतना पैसा है कि वह लाॅकडाउन का समय अपने बलबूते गुजार सके। ऐसे में मजदूर अपने घर की ओर रूख कर वापसी कर रहे हैं

सभी राज्यों की सरकार मजदूरों को रोजगार न होने पर राशन, पैसे और आवश्यक वस्तुएं प्रदान करने का दावा कर रही हैं। मगर कहीं न कहीं सिस्टम में कमी है जो राजू जैसे मजदूूरों तक सरकारी सहायता नहीं पहुंच रही है। निराश मजदूर अपने घर/गांव वापसी कर रहे हैं जिसे रोकने के लिये सार्थक प्रयास करना आवश्यक है।

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