नई दिल्ली: बढ़ते राजकोषीय घाटे के बावजूद केंद्र सरकार खर्च जारी रखेगी. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार इकोनॉमी को सहारा देने के लिए खर्च में बढ़ोतरी कर सकती है, चाहे इससे बजट घाटे में और बढ़ोतरी हो जाए. एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि सरकार जल्दबाजी में प्रोत्साहन खर्च (राहत पैकेज) में कमी करने का फैसला नहीं लेगी. इसके अलावा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी सरकारी कंपनियां कैपिटल एक्सपेंडिचर जारी रखें. केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि इस समय जिस तरह के हालात हैं, उसमें खर्च बढ़ाए जाने की जरूरत है और फिस्कल डेफिसिट से चिंतित होने की जरूरत नहीं है.
पिछले महीने कोरोना महामारी से बुरी तरह प्रभावित कंपनियों को उबारने और रोजगार बचाने को लेकर सरकार ने अर्थव्यवस्था के 15 फीसदी के बराबर राहत पैकेज के उपाय किए. इस फैसले से मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक बजट घाटा बढ़कर जीडीपी का 8 फीसदी तक हो सकता है जो निर्धारित लक्ष्य 3.5 फीसदी के दोगुने से भी अधिक है. वित्त मंत्री ने कहा कि आने वाले समय के लिए एक आकलन जरूरत है. उनका कहना है कि अभी खर्चों में तुरंत किसी कटौती के लिए सोचना भी संभव नहीं है. उनका कहना है कि खर्च में संतुलन बनाए रखना है क्योंकि इकोनॉमी में जो रिकवरी हुई है, वह लगातार बनी रहने के लिए यह जरूरी है.
सरकार ने जो कदम उठाए हैं, उसकी वजह से इकोनॉमी में रिकवरी दिखनी शुरू हो गई है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में रिकॉर्ड 24 फीसदी की दर से सिकुड़न के बाद दूसरी तिमाही में भी भारी गिरावट की उम्मीद की गई थी. हालांकि केंद्र सरकार के प्रयासों की वजह से दूसरी तिमाही में जीडीपी में 7.5 फीसदी की दर से गिरावट रही. इसके अलावा कुछ सेक्टर्स में बढ़ोतरी ने भी संकेत दिए हैं कि इकोनॉमी में सुधार हो रहा है.

