पैसे से क्या-क्या यहां खरीदोगे,दिल खरीदोगे या के जां खरीदोगे….

 
पैसे से क्या-क्या यहां खरीदोगे,दिल खरीदोगे या के जां खरीदोगे…. पैसे से क्या-क्या यहां खरीदोगे,दिल खरीदोगे या के जां खरीदोगे….

सुनील शर्मा

लो जी लो कर लो बात, ‘‘ माया महा ठगनी हम जानी’’ यह बात तो साधु-संत, योगी महाराज न जाने कब से बताते आ रहे हैं। मगर एक योगी जी उसी ‘माया’ के जाल में फंसा कर लोगों को ठगने का प्रयास करेंगे यह कभी सोचा नहीं था। और ठग भी किन लोगों को रहे हैं, जिन्होंने अपने परिवार का सदस्य खो दिया। तेज रफ्तार गाड़ी ने किसानों को कुचल दिया और मौके पर ही बेचारे जान गंवा बैठे। अब उन्हें तो लौटा कर ला नहीं सकते, न्याय दिला पायेंगे या नहीं यह संशय में है, तो लगा दिया मुआवजे का मलहम और बांध दी सरकारी नौकरी की पट्टी। अब थोड़ा टाईम भी दे दिया हत्या के आरोपी मंत्री पुत्र को, जा बेटा करले अपनी व्यवस्था, ढूंढ ले गवाह, कर ले सेटिंग, बाकी तो हम बैठे ही हैं न…

अब बात निकली है तो दूर तलक तो जाएगी अब चाहे बात की चपेट में योगी महाराज ही क्यों न आ जाये। अरे जो दुनिया-समाज को बताया है उसे खुद भी तो मानो की माया से किसका भला हुआ है? अब बताओ योगी महाराज मठ से निकलकर राजनीति के मैदान में उतर आये। अब आ गए तो चोला भले ही न बदला हो लेकिन अपना मन जरूर बदल लिया। अब अपनी ही पार्टी के मंत्री के बेटे की गिरफ्तारी करवाने में संकोच कर रहे हैं। सुशासन देने का दावा करते हैं और मरने वाले के परिवारों को माया-मोह का लालच दिखाकर उनसे चुप रहने की उम्मीद कर रहे हैं।

अब भाई करें भी तो क्या, एक तो मंत्री जी वह भी अपनी ही पार्टी के तो उनका बेटा भी तो अपना ही हुआ ना। अब किसी भगवाधारी नौजवान को जेल की सलाखों के पीछे धकेलने से पहले तमाम बातें सोचने पड़ती है , जोड़-घटा लगाना पड़ता है तब जाकर कार्रवाई की जाती है। अरे वो कोई गुंडा-बदमाश थोड़े ही है जिस की प्राॅपर्टी पर कभी भी बुलडोजर चलवा दिया जाए और वह जेल में बैठा हुआ कुछ ना कर पाए। अरे यह मंत्री जी का बेटा है तो खून तो गरम होगा ही। सत्ता की गरमी में गाड़ी जरा तेज चल गयी तो भला उसका क्या दोष। दे तो दिया मुआवजा, सरकारी नौकरी भी देंगे ही और क्या कर सकते हैं। अब जाने वालों के पीछे अपना युवा नेता खो देंगे तो आने वाला चुनाव कैसे जीतेंगे।

अब योगी जी हैं तो सबके मन की बात जानते हैं और जानते हैं कि सबसे बड़ी जरूरत पैसा होती है। मगर पैसे से योगी जी क्या-क्या खरीदोगे, किसी का दिल खरीदोगे या किसी की जां खरीदोगे? जाने वाला तो चला गया मगर यदि उसकी हत्या का आरोप किसी पर लगा है तो उसकी गिरफ्तारी तो होनी ही चाहिए। आम आदमी जुर्म करके फरार हो जाए तो उसके पूरे परिवार को थाने बिठा लिया जाता है। यहां तो मंत्री जी बेखौफ हैं और उनका हत्यारोपी बेटा कानून के शिकंजे से दूर कहीं बैठा मौज ले रहा है। मंत्री जी ने तो कह भी दिया है, बेटा समझदार है सोच-समझकर ही फैसला लेता है, जब उसकी मर्जी होगी आ जाएगा। अब भैया सत्ता में है तो थोड़ा तो दम दिखाना ही होगा वरना पूछेगा कौन।

योगी महाराज की सदा ही जय हो, मगर यह जय बनाये रखने के लिये सभी अपराधियों को एक ही चश्मे से देखना होगा। यदि पार्टी का चश्मा आंखों पर लगा रहा तो माफ किजियेगा अपराधी तो बच जायेगा मगर आपकी सत्ता का बचना मुश्किल हो जायेगा। महाराज, आपने पैसे दिये, आपसे ज्यादा देने वाले और आ गये। लेकिन आपका फर्ज है न्याय दिलाना, मुआवजा बांट कर पीड़ितों को अपने पाले में खिंचना नहीं। तो अब जागिये और जितनी मजबूती से विपक्षी नेताओं को घटनास्थल पर जाने से रोका था वैसी ही घेराबंदी कर मंत्री के बेटे को भी गिरफ्तार करवाईये। और थोड़ा जल्दी किजियेगा, लोगों का सब्र का बांध टूट रहा है और विश्वास उठता जा रहा है। कहीं इतनी देर न हो जाये कि घर वापस लौटना भी मुमकिन न हो सके।