स्पेशल स्टोरी: गरीब बेटियों की शादी के लिए मिलने वाला अनुदान भी बंद, क्या है भाजपा का सन्देश

 
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पहले फ्री राशन और अब गरीब बेटियों की शादियों के लिए मिलने वाला अनुदान यूपी की योगी सरकार ने बंद कर दिया है. रेवड़ी कल्चर के इस दौर में यूपी सरकार के इन फैसलों को गुजरात के चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल पीएम मोदी के मुफ्त योजनाओं के विरोध के बाद अब भाजपा इस तरह की योजनाओं को रिश्वत मानने लगी है और इसके खिलाफ बाकायदा अभियान छेड़ रखा है, मामला इस समय सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चूका है और उसे भी समझ में नहीं आ रहा है कि फ्रीबीज़ की परिभाषा क्या होनी चाहिए। किस योजना को इस्सके दायरे से अलग रखना चाहिए और किसे नहीं. 

दरअसल भाजपा शासित और पीएम मोदी के दिल के बेहद करीब राज्य गुजरात में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और विपक्षी पार्टियों AAP और कांग्रेस ने वहां मुफ्त योजनाओं की घोषणाओं का पिटारा खोल रखा है क्योंकि पिछले कुछ सालों से देखा जा रहा है मुफ्त बांटकर ढेर सारा वोट हासिल किया जा सकता है. इस कल्चर की शुरुआत किसने की यह एक अलग विषय है मगर इसे परवान भाजपा ने ही चढ़ाया। पिछले लोकसभा और यूपी विधान सभा चुनावों दुगना मुफ्त राशन बांटकर केंद्र और यूपी भाजपा ने आसानी से अपनी सत्ता को बरक़रार रखा. सत्ता पाने के इस हिट फॉर्मूले को आप संयोजक केजरीवाल ने आगे बढ़ाया और उसके पीछे पीछे कांग्रेस ने भी अपनाया जिसे लेकर भाजपा को काफी चिंता सताने लगी. उसे लगा कि यह तो मेरे ही दांव से मुझे ही चित करने की प्लानिंग है, लिहाज़ा भाजपा ने अब इसे रेवड़ी कल्चर बताना शुरू किया है और ऐसी घोषणाओं को वोट की खरीदारी मान रही है.

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राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा शासित यूपी में पहले मुफ्त राशन और गरीब बेटियों की शादी के लिए मिलने वाला 20 हज़ार रूपये का अनुदान बंद कर भाजपा यह साबित करना चाहती है कि वह हक़ीकत में रेवड़ी कल्चर के खिलाफ है. चूँकि दूसरी विपक्षी पार्टियां केंद्र और भाजपा शासित राज्यों की ऐसी योजनाओं को उसके सामने आईने की तरह पेश कर रही हैं इसलिए इस मामले में उसका असहज होना स्वाभाविक है और फिर मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. यूपी में ऐसी योजनाओं को बंद करके वह शीर्ष अदालत को सन्देश देना चाहती है देश से मुफ्त सौगातों का राजनीतिक खेल ख़त्म होना चाहिए। 

हालाँकि भाजपा के फ्रीबीज़ के विरोध को लोग सिर्फ गुजरात तक ही देख रहे हैं. विश्लेषकों का मानना है कि गुजरात चुनाव में वह आप और कांग्रेस की लोकलुभावन घोषणाओं को बंद करना चाहती है ताकि गुजरात का नाराज़ वोटर मुफ्त के चक्कर में भाजपा से दूर न चला जाय, विश्लेषकों का यह भी मानना है कि गुजरात चुनाव बाद भाजपा स्वयं रेवड़ी कल्चर को दोबारा शुरू करेगी। उसे मालूम है कि देश की 80 प्रतिशत आबादी मुफ्त राशन के चक्कर में आसानी से मंहगाई और बेरोज़गारी की समयस्याओं को भूल जाती है, उसे तो बस इतने में संतोष मिल जाता है कि घर में मुफ्त का राशन आ रहा है जिससे उनके परिवार का पेट भर रहा है.